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चौपालः धारा के विरुद्ध

मोटे तौर पर धारा 370 हटने का मतलब है कि अब जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान नहीं होगा। अलग झंडा भी नहीं रहेगा। वहां देश के दूसरे राज्यों के लोग जमीन खरीद सकेंगे, नौकरी पा सकेंगे और इसी के साथ जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल छह साल न होकर पांच साल होगा।

Author August 7, 2019 3:45 AM
Article 370: जम्मू कश्मीर हुआ केन्द्र शासित प्रदेश। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली संविधान की धारा 370 हटाने के प्रस्ताव को राज्यसभा के बाद अब लोकसभा ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। यह एक ऐतिहासिक फैसला है जिस पर कुछ समय से कई तरह की अटकलें लग रही थीं। कहना न होगा कि वर्तमान सरकार ने लोकसभा चुनावों में किए अहम वादों में से एक धारा 370 को हटाने का भी वादा जनता से किया था जिसे खूब विचार-मंथन के बाद सोमवार को सरकार ने राज्यसभा से और मंगलवार को लोकसभा से पास करा लिया। सोमवार को राज्यसभा में जहां जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक के पक्ष में 125 और विपक्ष में 61 वोट पड़े थे वहीं मंगलवार को लोकसभा में इसके पक्ष में 366 और विरोध में 66 मत पड़े।

मोटे तौर पर धारा 370 हटने का मतलब है कि अब जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान नहीं होगा। अलग झंडा भी नहीं रहेगा। वहां देश के दूसरे राज्यों के लोग जमीन खरीद सकेंगे, नौकरी पा सकेंगे और इसी के साथ जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल छह साल न होकर पांच साल होगा। इस धारा के हटने से जम्मू-कश्मीर में उद्यमी अपने प्रतिष्ठान/ उद्योग आदि लगा सकेंगे जिससे वहां के नागरिकों को विकास और रोजगार के नए-नए अवसर प्राप्त होंगे। वहां के नागरिकता कानून में विसंगति की वजह से छह दशकों से बिना किसी अधिकार के शरणार्थियों का जीवन जी रहे लाखों लोगों को बराबरी का दर्जा हासिल होगा। कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रदेश के बाहर शादी करने वाली कश्मीर की बेटियों को पैतृक संपत्ति में उनका जायज अधिकार हासिल हो सकेगा।

कुल मिलाकर धारा 370 को हटाने की वर्तमान सरकार की पहल से सिद्ध हो गया कि दृढ़ इच्छा-शक्ति के चलते प्रजातांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हुए कोई भी जनहितकारी निर्णय लिया जा सकता है। इस साहसिक फैसले के लिए केंद्र सरकार की तारीफ की जानी चाहिए। वैसे, गृहमंत्री ने बिल पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर हमेशा के लिए केंद्र-शासित प्रदेश नहीं रहेगा। जम्मू-कश्मीर की स्थिति सामान्य होते ही उसे पूर्ण राज्य का दर्जा फिर दे दिया जाएगा।
’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

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