ताज़ा खबर
 

चौपालः हार पर सरजी

आखिरकार दिल्ली में सरजी की पार्टी अपनी इमेज के वास्तविक मूल्यांकन वाला नगर निगम का चुनाव हार ही गई। वजह यह भी रही कि सरजी तो खूब बोलते रहे, मगर उनका काम नहीं बोल सका।

Author April 28, 2017 3:31 AM
दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल)

आखिरकार दिल्ली में सरजी की पार्टी अपनी इमेज के वास्तविक मूल्यांकन वाला नगर निगम का चुनाव हार ही गई। वजह यह भी रही कि सरजी तो खूब बोलते रहे, मगर उनका काम नहीं बोल सका। शायद उन्होंने अपने बड़बोलेपन के चलते अपने काम को ठीक से बोलने का मौका ही नहीं दिया! और फिर उनकी कश्ती वहां पर डूबी, जहां पानी बहुत ही कम था। वैसे पानी उनके प्रयासों की ईमानदारी में भी कुछ ज्यादा नहीं था। अगर होता तो सरजी कश्ती को अनाड़ी बता कर पानी में न तैर पाने की अपनी अक्षमता का यों खुलेआम बचाव नहीं कर रहे होते। अब जब वहां पानी था ही नहीं, तब वे अपनी हार के लिए न तो कश्ती को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं और न ही अपनी अनाड़ी तैराक वाली अक्षमता को। खैर, अब उनके पास एक ही बहाना शेष बचता है। वे खुलेआम अपने बयानों में ईवीएम को जिम्मेदार ठहरा कर इसे केंद्र की साजिश बता सकते हैं। ऐसा कर वे एक बार फिर जनता को मूर्ख समझने का अपना पारंपरिक मुगालता पाले रह सकते हैं। ऐसा वे कर भी रहे हैं। वैसे भी वे अपने मुगालतों से दो-चार कदम आगे चहलकदमी करने के आदी रहे हैं। उन्हें लगता है कि इस दुनिया में एक वे ही ईमानदार आदमी हैं। बाकी तो सारे के सारे लोग चोर-भ्रष्टाचारी हैं।

HOT DEALS
  • BRANDSDADDY BD MAGIC Plus 16 GB (Black)
    ₹ 16199 MRP ₹ 16999 -5%
    ₹1620 Cashback
  • Apple iPhone SE 32 GB Gold
    ₹ 19959 MRP ₹ 26000 -23%
    ₹0 Cashback

कोई दो राय नहीं कि अब सरजी अपनी हार से बौखला कर बहानों की बाढ़ में खतरे के निशान से ऊपर बहेंगे। हो सकता है इसके लिए वे समूचे लोकतंत्र को ही नाकारा और धोखेबाज घोषित कर दें। चुनाव आयोग को तो वे पहले ही ‘बहुत-कुछ’ कह भी चुके हैं। वे परम निंदा-संतोषी जीव हैं! उनका बस चले तो चांद में भी दोष ढूंढ़ निकालें। मगर उनके दुर्भाग्य से चांद में पहले से ही बहुतेरे दोष मौजूद हैं। उसमें काले-काले दाग-धब्बे साफ-साफ नजर आते हैं। इसलिए साबजी उसमें और अतिरिक्त दोष ढूंढ़ कर प्रकृति के लोकतंत्र में कोई बेजा मीन-मेख नहीं निकाल सकते। लिहाजा अब वे ईवीएम के सिर पर अपनी हार का ठीकरा फोड़ रहे हैं। इसके लिए वे एक पार्टी-विशेष की र्इंट से र्इंट तक बजाने की घोषणा कर चुके हैं। संभव है अब वे र्इंटें बजा-बजा कर ईंटों में भी भ्रष्टाचार का दोष ढूंढ़ निकालें।
सरजी का एक ख्वाब दिल्ली को लंदन बनाने का भी था। इसके लिए उन्होंने दिल्ली के लोगों को कचरे के ढेर तक पर जिंदगी गुजारने को मजबूर कर दिया। उन्हें मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसे रोग गिफ्ट में दिए। मगर अंतत: जनता भी घणी ही समझदार निकली। वह कचरे का वाजिब प्रबंधन करने का गुर खूब समझने लगी और उसने अपना काम कर भी दिया।
’राजेश सेन, अंबिकापुरी एक्सटेंशन, इंदौर

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App