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चौपाल: प्रदूषण के सामने

त्योहारों पर पर्यावरण के अनुकूल पटाखे का उपयोग करना चाहिए। ज्यादा शोर करने वाले पटाखों का असर इंसानों के अलावा पशु-पक्षियों और छोटे बच्चों पर होता है। ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए स्कूल-कॉलेज की बाउंड्री पर फेंसिंग, मेहंदी की झाड़ी या पेड़ ज्यादा लगाना चाहिए।

प्रदूषण से लोगों को हो रही परेशानी। फाइल फोटो।

ध्वनि प्रदूषण और हवा में प्रदूषण का बढ़ना चिंताजनक है जो स्वास्थ्य पर खतरे को लेकर आगाह करता है। खराब सड़कों से उड़ रहे धूल के हवा में घुलने और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले हानिकारक सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। हवा में फैलते जहर के मानक स्तर हवा की गुणवत्ता का पार्टिकुलेटर मैटर (0 से 200) तक रहना आवश्यक है।

तभी हम स्वस्थ रह सकते हैं। ध्वनि प्रदूषण को देखें तो साठ से अधिक डेसिबल भी ध्वनि को शोर या प्रदूषण माना जाता है। त्योहारों पर पर्यावरण के अनुकूल पटाखे का उपयोग करना चाहिए। ज्यादा शोर करने वाले पटाखों का असर इंसानों के अलावा पशु-पक्षियों और छोटे बच्चों पर होता है। ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए स्कूल-कॉलेज की बाउंड्री पर फेंसिंग, मेहंदी की झाड़ी या पेड़ ज्यादा लगाना चाहिए।

सड़कों के किनारों के दोनों और हरे वृक्ष लगाने से ध्वनि की तीव्रता को कम किया जा सकता है। वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने का संकल्प लेने की जरूरत है, ताकि लोग स्वस्थ रह सकें।
’संजय वर्मा ‘दृष्टि’, मनावर, धार, मप्र

निजता पर जोखिम

भारत में कोरोना महामारी के शुरुआती चरण में आरोग्य सेतु ऐप सभी के लिए जरूरी बताया गया था। हाल ही में आरोग्य सेतु ऐप से संबंधित जानकारी को लेकर एक आरटीआइ के तहत नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर से जानकारी मांगी गई थी और एनआइसी इस आरटीआइ का जवाब देने में असफल रही। इस संबध में एनआइसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

संबंधित विभाग यह जानकारी देने में असमर्थ रहा है कि इस ऐप को किसने तैयार किया है! अब सरकार इस पर जो सफाई पेश करे, लेकिन इस तरह की गड़बड़ी सामने आने के बाद लोगों के मन में उनकी निजी जानकारी की गोपनीयता भंग होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोग्य सेतु ऐप एक व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को संग्रहित करता है और स्वास्थ्य पर बढ़ते खतरे को देखते ही व्यक्ति को सचेत भी करता है।

लेकिन यह ऐप हमारे फोन से निजी जानकारी भी चुरा सकता है या नहीं, इसे लेकर हमारे पास कोई जानकारी नहीं है। इस तरह से किसी व्यक्ति की निजी जानकारी भंग होने की संभावना बढ़ जाती है।
’भूपेंद्र सिंह रंगा, कुरुक्षेत्र विवि, हरियाणा

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