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अच्छी पहल

मध्यप्रदेश में नए मकान के निर्माण के लिए अनुमति तब दी जाएगी, जब पौधे लगाए जाएंगे। मौजूदा समय के बहुस्तरीय संकट को देखते हुए इस तरह की घोषणा का स्वागत किया जाना चाहिए और इसे शीघ्र लागू किया जाए, ताकि समय समय रहते वर्षा काल में लाखों की संख्या में पौधारोपण हो सके।

सांकेतिक फोटो।

मध्यप्रदेश में नए मकान के निर्माण के लिए अनुमति तब दी जाएगी, जब पौधे लगाए जाएंगे। मौजूदा समय के बहुस्तरीय संकट को देखते हुए इस तरह की घोषणा का स्वागत किया जाना चाहिए और इसे शीघ्र लागू किया जाए, ताकि समय समय रहते वर्षा काल में लाखों की संख्या में पौधारोपण हो सके। सरकार इन पौधों को मुफ्त में उपलब्ध कराए, इसकी भी पहल की जानी चाहिए। लेकिन जिनके पास घर बनाने के लिए बहुत थोड़ी-सी जमीन है और जिसमें वे ठीक से घर भी नहीं बना सकते, वे अगर घर बनाना चाहें तो वे कहां पौधे लगाएंगे। सरकार को इस पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
’सज्जाद अहमद कुरेशी, शाजापुर, मप्र

मनमानी के मंच

पिछले कुछ दिनों से ट्विटर का रवैया बदला-बदला नजर आ रहा है। भारत के उपराष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल से ‘ब्लू टिक’ हटाना, सही एवं संवैधानिक ट्वीट को भी डिलीट करना दिखाता है कि ट्विटर भी अब पूर्ण रूप से स्वतंत्र नहीं है। नाइजीरिया सरकार ने ट्विटर के दुखद रवैये के चलते पिछले दिनों अनिश्चितकाल तक प्रतिबंधित कर दिया। नाइजीरिया के संचार सेवा संगठन द एसोसिएशन आॅफ लाइसेंस टेली कम्युनिकेशन आॅपरेटर ने अपने बयान मे कहा कि ट्विटर की सभी सेवाएं बंद कर दी गई हैं। वही सूचना एवं संस्कृति मंत्री लाई मुहम्मद ने बताया कि इस मंच का इस्तेमाल ऐसी गतिविधियों के लिए हो रहा है जो नाइजीरिया के कॉरपोरेट अस्तित्व को कमजोर कर रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति का पोस्ट हटाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की। वहीं अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठन, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि वह सोशल मीडिया पर रोक लगाने के लिए नाइजीरिया सरकार के निर्णय की निंदा करते है।

एक ओर भारत सरकार के नए कानून को भी ट्विटर समेत अन्य सोशल मीडिया कठघरे में खड़े कर रहे, वहीँ सोशल मीडिया देश मे भ्रामक और लोगों को भड़काने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे। ऐसे में सरकार को स्वदेशी ऐप्लिकेशन यानी स्वदेशी ऐप तैयार करने को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ इन पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शिकंजा कसना चाहिए। दूसरी ओर, एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए सरकार को अपने नागरिकों की अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र को ज्यादा से ज्यादा जगह देना चाहिए। इससे देश और सरकार को मजबूती ही मिलेगी।
’अमन जायसवाल, दिल्ली विवि, दिल्ली


बेसहारा बच्चे

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि मार्च से अब तक तीस हजार से अधिक बच्चे महामारी में बेसहारा हो गए हैं। माता-पिता के बिना जीवित रहना कितना कठिन है, यह केवल वही बच्चे जानते हैं। इन बेसहारा बच्चों को पता लगाना चाहिए कि सरकार और अन्य संगठन उन्हें सहायता प्रदान कर सकते हैं। वे भी हमारे देश का हिस्सा हैं। इसलिए हमें उनकी मदद करनी चाहिए और प्यार देना चाहिए।
’नरेंद्र कुमार शर्मा, जोगिंदर नगर, हिप्र

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