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चौपालः किसके लिए शिक्षा

यों तो सब कुछ सामने है, लेकिन अध्ययनों में भी लगातार यह बताया जा रहा है कि ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा में कितनी बड़ी तादाद में गरीब तबकों के बच्चे शिक्षा-व्यवस्था से ही बाहर हो जाएंगे, लेकिन इन आंकड़ों से किसी को कोई मतलब नहीं है।

अधिकतर स्कूल और कॉलेज संसाधनहीन स्थिति में किसी तरह से परीक्षा व्यवस्था को पूरा कर लेते हैं और मान लिया जाता है कि स्कूल-कॉलेज चल रहे हैं।

‘अभाव का पाठ’ (संपादकीय, 22 अगस्त) पढ़ा। यह इस दौर की बहुत बड़ी समस्या है, जिससे सरकार, संस्था और समाज तीनों ही जुड़े हुए हैं और तीनों ही असहाय लगते हैं या अपनी असमर्थता में मुंह छिपाए हुए हैं। राजस्थान में कॉलेज शिक्षा निदेशालय लगातार ई-शिक्षा पर जोर देते हुए इसे दुरुस्त करने का प्रयास कर रहा है, पर परिणाम वही ‘ढाक के तीन पात’ निकल कर आ रहा है। जैसा कि लिखा गया है, एकाएक इतनी अधुनातन माध्यम से शिक्षा कैसे दी जा सकती है, जब हमारे स्कूल और कॉलेज बहुत पुरानी व्यवस्था के तहत ही चल रहे हैं।

अधिकतर स्कूल और कॉलेज संसाधनहीन स्थिति में किसी तरह से परीक्षा व्यवस्था को पूरा कर लेते हैं और मान लिया जाता है कि स्कूल-कॉलेज चल रहे हैं। समय-समय पर सवालों का जवाब देकर कागजी कार्यवाही कर ली जाती है। वे कैसे और किस तरह से शिक्षा दे रहे हैं, इससे किसी को किसी तरह का सरोकार नहीं है। तीनों ही जिम्मेदार आधारभूत कारणों तक की बात नहीं करना चाहते हैं। सरकार निजीकरण में विश्वास करती है।

यों तो सब कुछ सामने है, लेकिन अध्ययनों में भी लगातार यह बताया जा रहा है कि ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा में कितनी बड़ी तादाद में गरीब तबकों के बच्चे शिक्षा-व्यवस्था से ही बाहर हो जाएंगे, लेकिन इन आंकड़ों से किसी को कोई मतलब नहीं है। सरकारी अधिकारी लीपापोती में माहिर हैं और समाज का वह वर्ग जो स्कूल-कॉलेजों में जा रहा है, वह निम्न वर्ग से है, जिसकी चिंता सरकार को न कल थी, न आज है और न शायद कल होने वाली हैं। ऐसे में क्या शिक्षा!
’रमेश चंद मीणा, बूंदी, राजस्थान

नशे का जाल
सिनेमा समाज का दर्पण होता है। कलाकारों में आम जनता अपनी छवि देखती है। लोग उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। फिल्म कलाकारों की लोकप्रियता के आगे सभी फीके पड़ जाते हैं। इन परिस्थितियों में कलाकारों का भी नैतिक दायित्व बढ़ जाता है। अभी बॉलीवुड सहित पूरा देश संकट के दौर से गुजर रहा है। सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या की खबरें अभी किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंची हैं, लेकिन बॉलीवुड में ड्रग्स की खबर सुन कर सभी सन्न रह गए। बताया जाता है कि रिया च्रकव्रती के ड्रग्स माफिया से संबंध और बॉलीवुड में कोकीन ड्रग्स से संबंधित खबरें चौंकाने वाली हैं।
गौरतलब है कि पूर्व में संजय दत्त जैसे कलाकार भी ड्रग्स का शिकार हो चुके थे। कलाकारों के इस आचरण से पूरा देश स्तब्ध है। हमारे देश में यह प्रतिबंधित है। नारकोटिक्स विभाग इसकी जांच प्रांरभ कर चुका है। सरकार को इस दिशा में कठोर कदम उठाने चाहिए, ताकि इसकी पूरी सच्चाई देश के सामने आए और दोषियों को कड़ी सजा मिले।
’हिमांशु शेखर, गया, बिहार

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