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चौपाल: क्रूरता की हद

दुनिया के सबसे आधुनिक और संपन्न देश अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में पिछले दिनों पुलिस द्वारा एक बच्ची के साथ क्रूरता का जो वाकया सामनेे आया है, उसने पूरी दुनिया को स्तब्ध करके रख दिया है।

Author Updated: February 17, 2021 8:56 AM
Brutualityसांकेतिक फोटो।

इससे पहला सवाल यही तो खड़ा होता है कि अमेरिका कैसा आधुनिक देश है जहां जरा मानवीयता की भावना नहीं है। जो देश पूरी दुनिया को लोकतंत्र, एकता, भाईचारे, शांति जैसे उपदेश दे रहा है, उस मुल्क में हिंसा की यह पराकाष्ठा।

ज्यादा परेशानी भरी और चिंता की बात तो यह है कि यह काम किसी अपराधी ने नहीं बल्कि उस पुलिस ने किया जिस पर लोगों की सुरक्षा का जिम्मा है। मात्र नौ वर्ष की बच्ची को गिरफ्त में लेकर उसकी आंखों मे काली मिर्च का स्प्रे छिड़क दिया और उसके हाथ-पैर बांध कर उसे घसीटा गया और बर्बरता से पीटा। ऐसी घटना की कल्पना मात्र से ही कोई भी सिहर उठेगा।

इससे पहले भी वाशिंगटन में 2014 मे एक बच्चे और कुछ लोगों को इसी तरह से प्रताड़ित करने की खौफनाक घटनाएं सामने आई थी। एक अश्वेत बच्चे की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। लोगों का मानना है कि ताजा घटना में बच्ची को सजा रंगभेद के चलते ही दी गई है।

हालांकि अब इस मामले पर लीपा-पोती कर दबाने का प्रयास किया जा रहा है। अगर घटना रंगभेद से जुड़ी है तो यह और भी गंभीर मामला है। लगता है इंसानियत की जगह अब हैवानियत ने ले ली है। क्या नौ वर्ष की बच्ची या महज ग्यारह, बारह साल का बच्चा जानता भी है कि ये रंगभेद होता क्या है और क्यों किया जाता है?
’वीना आडवानी, नागपुर

भ्रष्टाचार का दंश

सरकार भले कितने दावे कर ले कि देश में भ्रष्टाचार कम हो रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। आज स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि शिक्षा और न्याय के क्षेत्र भी इससे मुक्त नहीं रह गए हैं। देश के कर्णधार तो भ्रष्टाचार के दलदल में पहले से ही धंसे हुए हैं। अब हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार ने पैर पसार लिए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने इसे विश्वव्यापी मुद्दा कह कर काफी पहले इसे स्वीकार कर लिया था।

स्वर्गीय राजीव गांधी ने स्वयं स्वीकार किया था कि सरकारी योजना का केवल दस फीसद ही सामान्यजन तक पहुंच पाता है। और मौजूदा सरकार भी भ्रष्टाचार खत्म करने के वादे के साथ सत्ता में आई थी। लेकिन भ्रष्टाचार का वैश्विक सूचकांक हमें अपनी तस्वीर बताता है। पिछले दिनों ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में भारत को एशिया का सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार वाला देश बताया गया था। दरअसल भ्रष्टाचार ने नैतिक मूल्यों, देशभक्ति, अहिंसा तथा ईमानदारी आदि सबको निगल लिया है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार ने अपने पैर मजबूत कर लिए हैं। आए दिन नकल करने, पैसे से अंक बढ़वाने और पीएच.डी. की डिग्रियां बिकने के समाचार मिलते रहते हैं। इसी तरह डाक्टरी पेशे में व्यक्तियों ने मानव के अंगों का व्यापार शुरू कर रखा है। पहले सुनते थे कि पुलिस बदमाशों के साथ मिलीभगत रखते है, परंतु आज पुलिस स्वयं ही अपराधों में लिप्त है।

देश में पुलिस की स्थिति क्या है कि उत्तर प्रदेश के विकास दुबे कांड से साफ हो गया। समस्या यह है कि भ्रष्टाचार के दानव से कैसे मुक्ति पाई जाए? भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए कानूनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन दुख की बात है कि इन कानूनों पर ईमानदारी से अमल नहीं होता। न्याय प्रक्रिया जटिल और लंबी होने की वजह से आरोपियों को बचने का मौका मिल जाता है। सबसे बड़ी जरूरत इस बात की है कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे और भ्रष्टाचारियों को सख्त सजा देनी होगी।
’इकबाल राजा, मधेपुरा (बिहार)

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