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चौपालः नेपाल के साथ

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुन कर दोनों देशों के बीच रिश्तों में आती दरार को कम करने का संकेत दिया है।

Author April 12, 2018 3:52 AM
भारत अपनी सामर्थ्य के अनुसार पड़ोसी देशों की मदद करता आया है लेकिन चीन से मुकाबला करने के लिए अन्य उपाय करने होंगे।

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुन कर दोनों देशों के बीच रिश्तों में आती दरार को कम करने का संकेत दिया है। उनकी यात्रा से यही लगता है कि जितना भारत नेपाल के साथ रिश्तों को लेकर चिंतित है उतना ही नेपाल भी उत्साहित है। नेपाल में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत ने नई दिल्ली से काठमांडू तक ट्रेन चलाने की घोषणा की है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच शिक्षा, कारोबार, कृषि, रक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी है। ओली भारत के साथ अच्छे संबंध की बात तो करते हैं लेकिन तमाम वादों के बावजूद नेपाल की चीन के बाद पाकिस्तान के साथ नजदीकी भारत के लिए चिंता का विषय है।

भारत अपनी सामर्थ्य के अनुसार पड़ोसी देशों की मदद करता आया है लेकिन चीन से मुकाबला करने के लिए अन्य उपाय करने होंगे। चीन नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमा, श्रीलंका, मालदीव और पाकिस्तान में अपने प्रभाव का विस्तार करके भारत की घेराबंदी करने में जुटा है। चीन की नीयत हमेशा संदेह के घेरे में रही है। ऐसे समय में भारतीय कूटनीति को नए सिरे से पड़ोसी देशों के साथ अपने रिश्ते सुधारने होंगे। भारत को पड़ोसी देशों को छोटा समझने और बड़ा भाई बनने से बचना होगा। आज दक्षेस का महत्त्व कम हो गया है और वह अब लगभग निष्क्रिय है। समय आ गया है कि भारत नए सिरे से दक्षिण एशिया के देशों को जोड़े।

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राकेश कुमार राकेश, बिहार

ई-टिकट

रेलवे पर दिनोंदिन यात्रियों का भार बढ़ रहा है। टिकट खरीदने से लेकर सुरक्षित यात्रा एक बड़ी चुनौती है। ज्यादातर रेलवे स्टेशनों पर टिकट के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगी रहती हैं। कई बार तो ट्रेन छूटने के समय तक टिकट पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में भीड़ के बीच दिव्यांगों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग कतार की व्यवस्था भी दम तोड़ती नजर आती है। इसमें सुधार के लिए रेलवे स्टेशनों पर ई-टिकट मशीन की सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए जिससे युवा तकनीक के साथ जुड़ें और रेलवे स्टेशनों पर भीड़ कम हो।

महेश कुमार, सिद्धमुख, राजस्थान

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