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संपादकीयः जागने की जरूरत

खबरिया चैनलों के अनुसार दिल्ली के रोहिणी इलाके में रहने वाला कथित ठग बाबा आशु भाई हिंदू न होकर मुसलमान है और ठगी के धंधे में उतरने से पहले उसका नाम आसिफ खान था।

Author September 20, 2018 5:55 AM
अफसोस इस बात का है कि कोई भी नेता ऐसे बाबाओं के खिलाफ तब तक नहीं बोलता जब तक उन पर बलात्कार का आरोप न लग जाए।

जागने की जरूरत

खबरिया चैनलों के अनुसार दिल्ली के रोहिणी इलाके में रहने वाला कथित ठग बाबा आशु भाई हिंदू न होकर मुसलमान है और ठगी के धंधे में उतरने से पहले उसका नाम आसिफ खान था। क्या यह तथ्य यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि इस हिंदू बहुल देश में एक हिंदू नाम लोगों को ठगने और उनका विश्वास अर्जित करने में सहायता करता है? एक खबरिया चैनल का एंकर न जाने क्यों कह रहा था कि वह मासूम लोगों को ठगता था! दरअसल, कोई भी बाबा मासूम लोगों को नहीं, ज्यादातर अंधविश्वासी, लालची और दकियानूस लोगों को ठगता है।

अफसोस इस बात का है कि कोई भी नेता ऐसे बाबाओं के खिलाफ तब तक नहीं बोलता जब तक उन पर बलात्कार का आरोप न लग जाए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के हिमायती भी अपना भाषण वातानुकूलित कक्षों में उन लोगों के बीच देते हैं जो पहले से ही जागरूक होते हैं। दरअसल, हम सोये हुए लोगों के बजाय ‘जागे हुए लोगों को’ जगाते रहते हैं। इधर कुछ वर्षों से हम जनता का शोषण करने वाले बाबाओं को भी हिंदू-मुसलमान-ईसाई की नजर से देखने लगे हैं क्योंकि ऐसा करने से हमें समाज को बांटने में मदद मिलती है। क्या हम इस बात के लिए शर्मिंदगी महसूस करेंगे कि कभी भी ऐसी कोई ठोस कोशिश नहीं करते कि खुद को भगवान बताने वाले ऐसे लोगों का पुरजोर विरोध हो?

सुभाष चंद्र लखेड़ा, द्वारका, नई दिल्ली

विलय का खाता

वित्त मंत्रालय ने फैसला किया है कि बैंक ऑफ बड़ोदा, विजया बैंक और देना बैंक को मिला कर एक बैंक बना दिया जाएगा। इस विलय से यह तीसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा। पहले कहा जा रहा था कि बाईस बैंकों के स्थान पर केवल पांच बैंक रहेंगे; सत्रह सरकारी बैंकों का इनमें विलय कर दिया जाएगा। लगता है, इस योजना को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। क्या यह सब करके सरकार बैंकों की मूलभूत कमियों को दूर कर रही है? आज बैंकों के पास पूंजी की बहुत कमी है। घोषणा भी हुई थी कि सरकार उन्हें पूंजी देगी। उसका क्या हुआ? इस तरह विलय के खेल से तो जिन बैंकों की बैलेंस शीट ठीक-ठाक है उन्हें भी नुकसान होने लगेगा। मसलन, बैंक ऑफ बड़ोदा को ले लीजिए। एक दिन में उसके शेयर 17 फीसद गिर गए। बैंक एनपीए से भी जूझ रहे हैं। मौजूदा सरकार कह रही है कि यह कांग्रेस सरकार के समय हुआ है। कांग्रेस कहती है हमारे समय में तो एनपीए कम था, पिछले चार साल में यह तीन गुना बढ़ गया है। आरोप-प्रत्यारोप का खेल जारी है। अगर कांग्रेस दोषी है तो पूर्व मंत्रियों और बैंकों के आला अधिकारियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?

जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

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