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चौपाल: आखिर कब तक?

कब तक सुकमा नक्सलियों का अखाड़ा बनता रहेगा? कब तक हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे? ये कुछ सवाल हैं जो वर्षों से देशवासियों को असहनीय वेदना दे रहे हैं। इसलिए अब हम कह सकते हैं कि नक्सलियों ने क्रूर इरादों को कुचलने का वक्त आ गया है।

Author Published on: March 24, 2020 2:54 AM
नक्सली हमले के बाद जंगल में लापता जवानों की खोज। (फाइल फोटो- Indian Express)

इस बार नक्सलियों ने जिस तरह सीआरपीएफ के जवानों की हत्या का जो दुस्साहस किया है, उसका परिणाम भुगतने के लिए अब उन्हें तैयार रहना होगा। एक ओर भारत इन दिनों कोरोना महामारी के जूझ रहा है, वही दूसरी ओर नक्सली अपनी हरकतों को अंजाम देने में लगे हैं। यह कोई पहला मौका नहीं है जब नक्सलियों ने इतनी बड़ी संख्या में जवानों की हत्या की है। अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए नक्सली पिछले कुछ सालों में ऐसे बड़े हमलों को अंजाम देते रहे हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक हमारे जवान इस तरह मारे जाते रहेंगे और कब तक हम इतनी सहजता से इस कायराना करतूत को सहन करते रहेंगे?

कब तक सुकमा नक्सलियों का अखाड़ा बनता रहेगा? कब तक हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे? ये कुछ सवाल हैं जो वर्षों से देशवासियों को असहनीय वेदना दे रहे हैं। इसलिए अब हम कह सकते हैं कि नक्सलियों ने क्रूर इरादों को कुचलने का वक्त आ गया है। सरकार के एक आदेश से भारतीय सेना कुछ ही दिनों में छत्तीसगढ़, उडीसा सहित समस्त राज्यों से नक्सलवाद को सदा के लिए निस्तनाबूत कर सकती है। जो भारतीय सेना कुछ घंटों में ही दुश्मन मुल्क में सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक को सफलतापूर्वक अंजाम दे सकतीं है, वह नक्सलियों का क्या हश्र कर सकती है, इसका अंदेशा शायद ही हमें हो। अत: नक्सलियों से निपटने के लिए सरकार को साहसिक फैसले लेने की जरूरत है।
’सुरेंद्र कुमार, मंडी (हिमाचल प्रदेश)

भयावह हालात
चीन के वुहान शहर से आए कोरोना वायरस ने आज पूरी दुनिया में हाहाकार मचा दिया है। चिंता की बात यह है कि यह महामारी बहुत तेजी से फैल रही है और अभी तक इसका इलाज किसी भी देश के पास नहीं है। चीन, अमेरिका, इटली और इन जैसे अन्य विकसित देश जो खुद को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था मानते हैं, वे भी आज इस महामारी के सामने बेबस हो चुके हैं। भारत में यह महामारी विदेश से आने वालों के जरिए पहुंची है। जाहिर है, समय रहते हवाई अड्डों पर बाहर से आए लोगों की अच्छी तरह से जांच नहीं हुई। अगर चीन और इटली की तरह यह महामारी भारत में भी फैल गई, तो तबाही कल्पना भी नहीं की जा सकेगी।

समस्या यह है कि चीन, अमेरिका, इटली जैसे देशों के मुकाबले भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र इस महामारी का मुकाबला करने में सक्षम नहीं है। ऐसी परिस्थिति को देखते हुए ही केंद्र सरकार ने 22 मार्च को भारत को बंद रखा और लोगो से घरों में रहने की अपील की। महाराष्ट्र, पंजाब और केरल के हालात इसकी भयावहता बताने के लिए काफी हैं। ऐसे में देश के हर नागरिक का फर्ज बनता है कि वह सरकार की ओर से दी जाने वाली हिदायतों का सख्ती से पालन करे और इस महामारी से लड़ने में सरकार का साथ दे।
’राघव जैन, जालंधर

कोरोना को चुनौती
हमारा देश विभिन्न संस्कृतियों का देश है, जो समूचे विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है। प्रधानमंत्री के आह्वान पर देश के सभी नागरिकों ने कोरोना से निपटने में लगे स्वास्थ्य व अन्य कर्मियों को धन्यवाद कहने के लिए रविवार शाम पांच बजे पांच मिनट तक जिस तरह से शंख, ताली, थाली बजाई, वह किसी कीतिर्मान से कम नहीं है। आज जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से लड़ रही है, तब भारत में जनता कर्फ्यू को व्यापक समर्थन अनेकता में एकता की भी मिसाल देता है। जब कदम सबके साथ उठते हैं तो हर चुनौती छोटी हो जाती है। अगर हम सभी थोड़े दिन और सावधानी बरतें और अपने घरों में रहे तो कोरोनावायरस कहीं से भी आया हो, हार कर भारत से ही जाएगा।
’हर्षवर्धन सिंह, रायबरेली

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