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चौपाल : स्मार्ट विलेज

स्मार्ट सिटी की तर्ज पर भारत में क्या स्मार्ट विलेज का होना ज्यादा जरूरी नहीं? हर गांव में पर्याप्त संख्या में तालाब हों, पेड़ हों, साफ-सुथरी सड़कें हों, बिजली हो, पशु रखने और चरागाह की व्यवस्था हो, अस्पताल हो, स्कूल-कॉलेज हों।

Author नई दिल्ली | Published on: June 2, 2016 12:35 AM
इस गांव में प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक हैं रहते। (Representative Image)

स्मार्ट सिटी की तर्ज पर भारत में क्या स्मार्ट विलेज का होना ज्यादा जरूरी नहीं? हर गांव में पर्याप्त संख्या में तालाब हों, पेड़ हों, साफ-सुथरी सड़कें हों, बिजली हो, पशु रखने और चरागाह की व्यवस्था हो, अस्पताल हो, स्कूल-कॉलेज हों। कहते हैं, भारत गांवों का देश है, पर लगभग हर राज्य गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। पर्यावरण प्रदूषण ने लोगों का जीना दूभर कर रखा है, जंगल सिमटते जा रहे हैं, कंक्रीट के जंगल शहरों में उग रहे हैं। आज गांव देहात के लगभग पचास प्रतिशत घरों में ताले लटक चुके हैं। लोग गांव छोड़ कर जा रहे हैं क्योंकि वहां रोजगार नहीं है, विकास की कोई संभावना नहीं रह गई है। किसानों को फसल बेच कर उसकी लागत भी नहीं मिल रही, मुनाफा तो दूर की बात है। जिनके पास गांव छोड़ने का कोई विकल्प नहीं है, वे ही खेती से जुड़े हैं। मेरे सपनों के स्मार्ट विलेज के होने से, ये सारी समस्याएं क्या समाप्त नहीं हो जाएंगी और गांव व शहर एक दूसरे को बचाने में नहीं लग जाएंगे?

(देवेंद्रराज सुथार, जालोर, राजस्थान)

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