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धारा की आड़

संविधान सभा को सरकार ने यह आश्वासन भी दिया था कि जब कश्मीर में युद्ध की स्थिति खत्म हो जाएगी, तब यह अनुच्छेद भी समाप्त कर दिया जाएगा।

Author April 13, 2019 5:25 AM
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (एक्सप्रेस फोटो)

कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणापत्र में कश्मीर के बाबत कहा है कि वहां वह सेना और अर्धसैनिक बल घटाएगी और उनके कानूनी सुरक्षा कवच ‘अफ्स्पा’ को कमजोर करेगी। इसमें आतंकवाद का कोई जिक्र नहीं है। कांग्रेस के सहयोगी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद 370 को स्थायी बताते हुए उसके हटने पर शेष भारत से कश्मीर का रिश्ता टूट जाने की धमकी दी है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं को पता होना चाहिए कि अनुच्छेद 370 नहीं, बल्कि अनुच्छेद 1 के कारण जम्मू-कश्मीर भारत का अंग है। जब (26/10/1947) जम्मू-कश्मीर रियासत का भारत में विलय हुआ तो 370 का कहीं नामोनिशान नहीं था। यह अनुच्छेद संविधान सभा ने सबसे अंत में अक्तूबर 1949 में संविधान में जोड़ा। जिस भाग 21 में यह रखा गया है, उसका शीर्षक है ‘अस्थायी, संक्रमणकालीन तथा विशेष प्रावधान’। अनुच्छेद 370 का अपना उपशीर्षक है ‘जम्मू-कश्मीर राज्य की बाबत अस्थायी प्रावधान’। यानी एक बार नहीं, दो-दो बार संविधान कहता है कि अनुच्छेद 370 अस्थायी है, और इस संविधान पर फारूक अब्दुल्ला के पिता और उमर अब्दुल्ला के दादा शेख अब्दुल्ला के भी हस्ताक्षर हैं।

संविधान सभा को सरकार ने यह आश्वासन भी दिया था कि जब कश्मीर में युद्ध की स्थिति खत्म हो जाएगी, तब यह अनुच्छेद भी समाप्त कर दिया जाएगा। साफ है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के दोनों नेता संविधान के विरुद्ध बयानबाजी कर रहे हैं, उस संविधान के जिसकी वे शपथ लेकर सांसद-विधायक-मंत्री-मुख्यमंत्री बन चुके हैं। असली बात यह है कि 370 की आड़ में कश्मीर के जिन सौ-सवा सौ राजनीतिबाजों को अकूत पैसा कमाने का मार्ग मिला हुआ है, उसके बंद हो जाने का खतरा इन्हें सता रहा है। पर सवाल है कि कांग्रेस क्या उनके इस रुख से सहमत है?
’अजय मित्तल, खंदक, मेरठ

अंपायरिंग पर सवाल
आईपीएल का बारहवां सीजन लगभग आधा समाप्त हो चुका है लेकिन इस आधे सफर के दौरान कई बार अंपायरों के खराब निर्णय देखने को मिले हैं। प्रतिभागी टीमों को इसका खमियाजा मैच गंवाकर भी चुकाना पड़ा है। गुरुवार को खेले गए, चेन्नई और राजस्थान के मैच में एक बार फिर खराब अंपायरिंग देखने को मिली। आईपीएल को विश्व की सबसे कठिन क्रिकेट प्रतियोगिता का दर्जा मिला हुआ है। उसमें इस तरह की खराब अंपायरिंग देख कर अनेक सवाल खड़े होते हैं। जिस तरह से बुरा बर्ताव या किसी खिलाड़ी की गलत प्रतिक्रिया पर उस खिलाड़ी पर जुर्माना लगाया जाता है उसी तरह खराब अंपायरिंग करने पर अंपायर पर भी जुर्माना लगाया जाना चाहिए ताकि वह अपनी गलती छिपाने के लिए गलत निर्णय लेने से पहले सोच विचार जरूर करे। साथ ही डीआरएस का इस्तेमाल अंपायर के निर्णय को बदलने के लिए भी किया जाना चाहिए ताकि क्रिकेट का खेल और भी निष्पक्ष हो सके।
’निशांत रावत, आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

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