ताज़ा खबर
 

चौपाल : शिक्षा पर दाग, नोटबंदी के बावजूद

यह हकीकत है हमारे आज के पढ़े-लिखे समाज की। आज इस समाज में लड़कियों के साथ होने वाले अपराधों में पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाओं का भी योगदान है।

Author April 6, 2017 6:20 AM
बांग्‍लादेश की शीर्ष अदालत के फैसले के बाद महिला के शव को दफनाया जाएगा। (प्रतीकात्मक चित्र)

शिक्षा पर दाग
उत्तर प्रदेश महिला अपराधों के मामले में हमेशा सुर्खियों में रहता है लेकिन इस बार एक गंभीर अपराध किसी पुरुष ने नहीं बल्कि महिला ने कर डाला। मुजफ्फनगर जिले में तिगरी गांव में एक हॉस्टल वार्डन ने सत्तर बच्चियों के निर्वस्त्र करके एक साथ सिर्फ क्लास में इसलिए बंद कर दिया कि उसे हॉस्टल के बाथरूम में खून के धब्बे दिखे थे। इन्हें देखते ही वार्डन तिलमिला गई और बच्चियों के कपड़े उतरवा कर जांच करने लगी। यह हरकत निहायत शर्मनाक है और हमें सोचने पर मजबूर कर देती है कि आखिर लोग ऐसा कैसे कर जाते हैं!
बहरहाल, बच्चियों और उनके परिजनों की शिकायत पर वार्डन को बर्खास्त कर दिया गया है, इसके साथ ही उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। हॉस्टल वार्डन ने, जो उस स्कूल की प्रिंसिपल भी थी, सफाई देते हुए कहा कि ‘यह मेरे खिलाफ साजिश है, मैं छात्राओं की पढ़ाई को लेकर सख्त हूं इसलिए कुछ लोगों ने लड़कियों को मेरे खिलाफ भड़काया। बाथरूम में ब्लड देख कर मुझे छात्राओं की चिंता हुई इसलिए मैंने सिर्फ चेकिंग की थी।’ वहीं छात्राओं का कहना था कि ‘हमें छात्रावास से नीचे बुलाया गया और मैडम ने कपड़े उतारने को कहा, ऐसा न करने पर पीटने की भी धमकी दी।’
उस स्कूल की प्रिंसिपल का इतनी-सी बात पर बच्चियों को निर्वस्त्र करना वाकई शर्म की बात है। यह हकीकत है हमारे आज के पढ़े-लिखे समाज की। आज इस समाज में लड़कियों के साथ होने वाले अपराधों में पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाओं का भी योगदान है।
विनीता मंडल, इलाहाबाद
नोटबंदी के बावजूद

नोटबंदी को जनता ने अपना भरपूर समर्थन दिया जिसकी पुष्टि पिछले दिनों कई राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों के रूप में हुई। अभी तक सरकार ने नोटबंदी के नफा-नुकसान का ब्योरा जनता के सामने प्रस्तुत नहीं किया है। नोटबंदी के पीछे मंशा थी कि इससे आतंकवाद पर लगाम कसने में मदद मिलेगी और कालेधन को खत्म करके देश के विकास का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा। मगर अभी तक इसके सकारात्मक प्रभाव तो नजर नहीं आए अलबत्ता नकारात्मक दृश्य जरूर दिखाई दे रहे हैं।
नोटबंदी के बाद जिस प्रकार अभी तक जाली नोटों के साथ-साथ 2000 और 500 के नए नोट भी पकड़े जा रहे हैं वह काफी चिंताजनक है। इसी तीन अप्रैल को जनसत्ता में छपी खबर के अनुसार नोटबंदी के बाद नक्सलियों से लगभग एक करोड़ रुपए बरामद किए गए हैं। छापे मार कर रुपए पकड़ना अलग बात है लेकिन सवाल है कि आखिर तमाम सख्त नियमों के बावजूद नक्सलियों के पास इतनी मोटी रकम आई कहां से? इस समस्या के मूल में पहुंचना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए तभी नोटबंदी में एक सफल कदम साबित होगी।
चंदन कुमार दुबे, पूर्वी चंपारण, बिहार

दिल्ली: JNU के छात्र ने आत्महत्या की, पंखे से लटकता मिला शव

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App