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चौपालः ‘संतों की सीख’ और ‘निजता में सेंध’

हमारे देश में बहुत-से साधु-संत हुए हैं जिन्होंने अपनी शिक्षाओं और उपदेशों से समाज को एक नई और अच्छी दिशा दी है।

Author Published on: June 28, 2018 3:52 AM
फेसबुक। फोटो- एपी

संतों की सीख

हमारे देश में बहुत-से साधु-संत हुए हैं जिन्होंने अपनी शिक्षाओं और उपदेशों से समाज को एक नई और अच्छी दिशा दी है। इन्हीं संतों में से एक थे कबीर। उन्होंने इंसान को जो शिक्षाएं दी हैं, अगर वह उनका अनुसरण करता हुए सांसारिक यात्रा पूरी करे तो जिंदगी में कभी भी न तो खुद दुखी हो सकता है और न ही अहंकार वश अपने गलत कामों से दूसरों को परेशान करके दूसरों को दुखी कर सकता है। आज समाज में बहुत से अनैतिक काम हो रहे हैं, जिसका कारण है कि इंसान अपनी संस्कृति और संतों के विचारों से दूर हो रहा है। आज इंसान आधुनिकता की अंधी दौड़ में अपने बच्चों को भी संतों की शिक्षाओं से अवगत नहीं करा रहा है। स्कूलों में हिंदी की किताबों में इन संतों के दोहों को शामिल तो किया गया है, लेकिन आधुनिकता की अंधी दौड़ में अध्यापक भी इन दोहों को बच्चों के कोमल मन में अच्छी तरह बिठाने की कोशिश नहीं करते हैं। इसके कारण आज बच्चे शिष्टाचार भूल रहे हैं और अनैतिक कामों में शामिल होने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं।

’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

निजता में सेंध

फेसबुक पर लोगों का डाटा लीक करने और बेचने के आरोप कई बार लग चुके हैं। इसी सिलसिले में यूरोपीय संसद में फेसबुक के कर्ताधर्ता मार्क जकरबर्ग की पेशी हुई। जकरबर्ग को कठघरे में खड़ा करके डाटा लीक, डाटा का गलत इस्तेमाल, चुनावों में हस्तक्षेप, फेक न्यूज, साइबर बुलिंग और टैक्स चोरी जैसे संगीन मसलों पर सवाल किए जाने थे पर अफसोस कि ऐसा हो न सका। यूरोपीय सांसदों ने जकरबर्ग को घेरने का सुनहरा अवसर खो दिया। कुछ सांसदों ने सवाल भी पूछे, जो महज औपचारिकता भर थे। सांसदों के बचकाने सवालों का जकरबर्ग ने बड़ी आसानी से जवाब देते हुए अपने कारनामों के लिए माफी मांग ली।

देखा जाए तो बीते एक दशक से फेसबुक के पास दुनियाभर के करोड़ों नागरिकों का निजी डाटा उपलब्ध है। अब फेसबुक से लोगों का डाटा चोरी होना आएदिन की खबर हो गई है। आश्चर्य की बात है कि फेसबुक का बिजनेस मॉडल ही डाटा पर आधारित है। इस डाटा के चलते ही आज फेसबुक का कारोबार अरबों डॉलर का हो गया है। एक व्यक्ति(मार्क जकरबर्ग) के पास दुनिया के करोड़ों लोगों की जानकारियां मौजूद हैं और निश्चित तौर पर कोई नहीं जानता कि यह आदमी भविष्य में क्या करने वाला है। लिहाजा, वक्त आ गया है कि फेसबुक को कानूनी दायरे में लाया जाए।

’पवन कुमार मौर्य, नोएडा

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