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चौपाल: आशंका के उलट

यह भी सच है कि इस बीमारी से लड़ने का अब तक का सबसे कारगर उपाय इम्यूनिटी को ही माना गया है। इस लिहाज से देखें तो लाखों की संख्या में मजदूरों ने यह साबित किया है कि जिसके भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होगी, वह आसानी से इस वक्त से लड़ पाएगा।

lockdown, migrant workersतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (पीटीआई फोटो)

देशव्यापी पूर्णबंदी में जब प्रवासी श्रमिक पैदल ही घरों की ओर निकल पड़े तो ऐसा लग रहा था कि वायरस हर उस कोने तक पहुंच जाएगा जहां वे श्रमिक पहुंचेंगे।

आशंका जताई जा रही थी कि गांवों में कोरोना विस्फोट हो सकता है। पर अभी तक ऐसा देखने को मिला नहीं। इस आशंका के ठीक विपरीत शहरी क्षेत्रों से अधिकतर मामले सामने आए हैं। लगभग अस्सी फीसदी मामले शहरी क्षेत्र से हैं।

दरअसल, लाखों की संख्या में वापस लौट रहे प्रवासी श्रमिकों को कोरोना कॅरियर माना जा रहा था। सरकार ने भी इनसे खतरा मानते हुए उन्हें जनपद की सीमा पर रोक कर पूरी तरह अलग-थलग करना शुरू कर दिया था। फिर बाद में उसमें ढील दी जाने लगी, क्योंकि मजदूर मेहनतकश होते हैं, इसलिए उनका इम्यूनिटी सिस्टम बहुत अच्छा होता है।

दूसरी ओर, यह भी सच है कि इस बीमारी से लड़ने का अब तक का सबसे कारगर उपाय इम्यूनिटी को ही माना गया है। इस लिहाज से देखें तो लाखों की संख्या में मजदूरों ने यह साबित किया है कि जिसके भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होगी, वह आसानी से इस वक्त से लड़ पाएगा।
’रितिक सविता, दिल्ली विवि

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