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चौपाल: अंधविश्वास की डोर

कुछ साल पहले हैदराबाद के एक सरकारी अस्पताल में हवन और यज्ञ कराया गया था जो अंधविश्वास को बढ़ावा देता है। अब आज इस इक्कीसवीं सदी में जहां रूढ़िवादी सोच हावी है, उसमें अब कुछ वैज्ञानिक संस्थाओं के नाम को जोड़ कर अपने दवाओं को फर्जी तरीके से बेचा जा रहा है।

चिकित्सा के क्षेत्र में तमाम वैज्ञानिक विकास के बावजूद लोग अंधविश्वास में आकर खुद के साथ गलत प्रयोग करने लगते हैं और नुकसान उठाते हैं।

वैश्विक स्तर पर चिकित्सा क्षेत्र में जहां बहुत तेजी से उन्नति हो रही है, वहीं कुछ लोग उसमें भी अंधविश्वास फैलाने की कोशिश करके उसमें बाधा बन रहे हैं और वैज्ञानिक चिकित्सा की राह मुश्किल की जा रही है। अंधविश्वासी लोग विज्ञान में अमूर्त बातों का घालमेल करके अपना वर्चस्व और बाजार बनाने की कोशिश करते हैं।

वर्तमान में कोरोना वायरस का इलाज अभी तक नहीं खोजा जा सका है और उसके लिए टीका तैयार करने की कोशिश चल रही है। लेकिन हमारे देश में कुछ नेता कहीं इस महामारी के इलाज के लिए गोमूत्र, तो कहीं पापड़, कहीं हनुमान चालीसा को उपाय बता रहे हैं। यह देश में वैज्ञानिक चेतना के प्रसार में एक बड़ी बाधा के रूप में सामने आया है।

कुछ साल पहले हैदराबाद के एक सरकारी अस्पताल में हवन और यज्ञ कराया गया था जो अंधविश्वास को बढ़ावा देता है। अब आज इस इक्कीसवीं सदी में जहां रूढ़िवादी सोच हावी है, उसमें अब कुछ वैज्ञानिक संस्थाओं के नाम को जोड़ कर अपने दवाओं को फर्जी तरीके से बेचा जा रहा है।

हालांकि दवाओं के नाम पर चलने वाले क्लीनिकल ट्रायल पर भी तमाम सवाल उठते रहे हैं और उनके दुष्परिणामों को लेकर चिंता जताई जाती रही है। लेकिन झूठ और अंधविश्वास का सहारा लेकर लोगों को भरमाने की कोशिश पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
’गोलू सौंदर्य, आजमगढ़ उप्र

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