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मेडिकल टूरिज्म के एक प्रमुख ठिकाने के तौर पर उभर रहा है भारत

भारत में इलाज का बेहद कम खर्च, आधुनिकतम चिकित्सा तकनीकों और उपकरणों की उपलब्धता के साथ ही विदेशियों को भाषा की समस्या न होने की वजह से यहां सबसे ज्यादा ऐसे पर्यटक आते हैं

Author June 13, 2017 5:49 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

चिकित्साटन

भारत चिकित्साटन (मेडिकल टूरिज्म) के क्षेत्र में विदेशी निवेश के एक प्रमुख ठिकाने के तौर पर उभर रहा है। इस क्षेत्र में काफी विदेशी निवेश हुआ है और अब भी इसमें निवेश की काफी संभावनाएं हैं। एशियाई देशों में चिकित्साटन के लिहाज से भारत फिलहाल पहले नंबर पर है। थाईलैंड, सिंगापुर, चीन और जापान जैसे देश भी अब ऐसे पर्यटकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन भारत में इलाज का बेहद कम खर्च, आधुनिकतम चिकित्सा तकनीकों और उपकरणों की उपलब्धता के साथ ही विदेशियों को भाषा की समस्या न होने की वजह से यहां सबसे ज्यादा ऐसे पर्यटक आते हैं। भारत में विदेशों के मुकाबले एक चौथाई से भी कम खर्च में इलाज के साथ घूमना-फिरना भी हो जाता है।

विदेशी मरीज मुख्य तौर पर जिन बीमारियों का इलाज कराने भारत आते हैं उनमें अंग प्रत्यारोपण, दिल की बाइपास सर्जरी, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, हिप रिप्लेसमेंट और वैकल्पिक चिकित्सा प्रमुख हैें। कम लागत में विश्वस्तरीय चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध होने की वजह से बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और म्यांमा के अलावा यूरोप के कई देशों और अमेरिका से भी मरीज यहां आते हैं। कुछ मुल्कों के लिए यहां ‘वीजा आॅन अराइवल’ की सुविधा होने के कारण मरीजों को किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता। भारत में निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं आधुनिक और उच्च स्तरीय होती जा रही हैं और इसकी छवि मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में उत्तरोतर सुधरती जा रही है। पिछले वर्ष लगभग छह लाख विदेशी इलाज के लिए भारत आए थे और इस साल इस आकड़े में और वृद्धि की संभावना है। पिछले वर्ष अकेले अपोलो अस्पताल में 60 हजार के आसपास विदेशी मरीज आए थे जिनमें अमेरिका और यूरोप के लगभग बीस प्रतिशत मरीज थे। मैक्स और फोर्टिस अस्पताल में भी क्रमश: बीस हजार और छह हजार विदेशी मरीज आए थे जिनमें लगभग बीस प्रतिशत मरीज अमेरिका और यूरोप के थे। इन मरीजों के कारण लगभग साढ़े चार हजार करोड़ रुपए की आय हुई थी।

यह स्वाभाविक है कि अच्छा और किफायती इलाज दुनिया में जहां भी उपलब्ध होगा ‘ग्लोबल विलेज’ के नागरिक उसी ओर रुख करेंगे। इस समय मेडिकल टूरिज्म के मामले में अकेले भारत ही नहीं बल्कि थाईलैंड, मलेशिया, ब्राजील और सिंगापुर बड़ी संख्या में अपने यहां विदेशी मरीजों को आकर्षित कर रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र में जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा है। पर्यटन मंत्रालय मेडिकल टूरिज्म के प्रचार और प्रोत्साहन पर ध्यान दे, आयुर्वेद और योग जैसे विकल्पों को अधिक से अधिक अपनाया जाए, अस्पताल किसी मरीज से ठगी न करें, यह सुनिश्चित किया जाए ताकि देश की छवि धूमिल न हो।
’संतोष कुमार, बठिंडा, पंजाब
वाजिब मूल्य

हमारे डॉक्टर, इंजीनियर, नौकरशाह और संगठित क्षेत्र के दूसरे अधिकारी अक्सर यह शिकायत करते रहते हैं कि उन्हें विकसित देशों में समान कार्य करने वाले लोगों की तुलना में एक चौथाई या इससे भी कम वेतन मिलता है। वे लोगों को यह नहीं बताते कि उन देशों में टमाटर या अन्य दूसरी सब्जियां तीन-चार सौ रुपए प्रति किलोग्राम मिलती हैं। वे यह भी महसूस नहीं करते कि दिल्ली जैसे शहर में बारह घंटे खड़े-खड़े ड्यूटी करने वाले सिक्योरिटी गॉडर््स को प्रति महीने महज सात-आठ हजार रुपए वेतन मिलता है। उन्हें तीन किलोमीटर तक धूप में ले जाने वाले रिक्शा चालक को बीस रुपए देने में भी तकलीफ होती है।
इन्हीं विसंगतियों के चलते देश में कृषि उत्पादों का वाजिब मूल्य तय करना कठिन काम हो जाता है क्योंकि भाव ऐसे होने चाहिए जिनसे गरीब को भी दो जून की रोटी नसीब हो सके। शेष राजनीति अपनी जगह है। राजनीति के गपोड़ शंख वोट के हिसाब से अपनी नीति तय करते हैं।
’सुभाष चंद्र लखेड़ा, द्वारका, नई दिल्ली

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