चौपाल: करिश्माई शख्सियत

माराडोना बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उन्होंने अपनी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि अपनी प्रतिभा को लगातार निखार कर और अपने खेल के आगे उसे परास्त कर दिया। उन्होंने दुनिया के सामने यह साबित किया कि कैसे फर्श से अर्श पर पहुंचा जा सकता है।

Deathमहान फुटबॉल खिलाड़ी माराडोना नहीं रहे। फाइल फोटेा।

माराडोना फुटबॉल के इतिहास के वैसे करिश्माई खिलाड़ी थे, जिनके इशारों पर फुटबॉल नाचता था। उन्होंने अपने इक्कीस साल के फुटबॉल कॅरियर के दौरान कई हैरतअंगेज गोल किए, जिन्हें आज की युवा पीढ़ी यूट्यूब या किसी और मंच पर उसके वीडियो देख कर नहीं थकती। उनके प्रशंसकों की तादाद का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि उनकी एक झलक पाने के लिए लोग कई-कई घंटों तक उनके घर के बाहर इंतजार किया करते थे।

माराडोना बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उन्होंने अपनी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि अपनी प्रतिभा को लगातार निखार कर और अपने खेल के आगे उसे परास्त कर दिया। उन्होंने दुनिया के सामने यह साबित किया कि कैसे फर्श से अर्श पर पहुंचा जा सकता है। इसलिए उन्हें ‘फुटबॉल का भगवान’ कहा जाता है। पच्चीस नवम्बर को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई और इसी के साथ माराडोना का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। लेकिन वे अपने पीछे जो स्मृतियां छोड़ कर गए हैं, वे अब हमेशा के लिए दर्ज रहेंगी।

फुटबॉल के इस जादूगर की लंबाई पांच फुट पांच इंच थी, लेकिन फुटबॉल के मैदान और दुनिया में उन्होंने ऐसी ऊंचाई हासिल की, जहां तक दूसरे को पहुंचने में शायद लंबा वक्त लगे। वह भी देखना होगा। माराडोना ने 1986 में अपनी अगुआई में अर्जेंटीना को फुटबॉल विश्वकप जिताने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इस विश्वकप को माराडोना को दो सबसे मशहूर गोल के लिए याद किया जाता है।

पहले गोल को ‘हैंड आॅफ गॉड’ और दूसरे को ‘गोल आॅफ सेंचुरी’ के नाम से जाना जाता है। इन दो गोलों को तब तक याद रखा जाएगा, जब तक यह खेल है। 1984 में माराडोना इटली के फुटबॉल क्लब नापोली से जुड़ गए। सबसे बड़ी बात यह है कि इस क्लब ने माराडोना की फीस चुकाने के लिए बैंक से लोन लेकर सतहत्तर करोड़ रुपए चुकाए थे। उस समय वे दुनिया के सबसे महंगे खिलाड़ी थे। डिएगो माराडोना आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमेशा हमारे जेहन में जीवित रहेंगी।
’गौतम एसआर, भोपाल, मप्र

पाकिस्तान की हरकत

पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम का बार-बार उल्लंघन किया जा रहा है। इसका कारण शायद यह है कि सर्दियां आने वाली हैं, इसलिए पाकिस्तान ज्यादा से ज्यादा आंतकवादियों को भारत की सीमा में भेजना चाहता है। यों पहले भी पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर में आंतकी भेजता रहा है। सवाल है कि इतना नुकसान पहुंचाने वाले पाकिस्तान को लेकर विश्व समुदाय की आंखें क्यों नहीं खुल रही हैं। इसके मद्देनजर भारत को भी अब ठोस कदम उठाना चाहिए। हाल ही में हमारे कई सैनिक संघर्ष विराम के उल्लंघन के कारण शहीद हुआ है।

हालांकि पाकिस्तान जानता है कि भारत से लड़ाई का मतलब इतिहास को दोहराना होगा। उसे 1948, 1965, 1971 और 1999 में हुई दुर्गति के बारे में पता है। इसलिए वह सीधी लड़ाई से बच रहा है। पाकिस्तान को मशविरा है कि वह आंतकवाद का रास्ता छोड़ कर अपने नागरिकों की भलाई के रास्ते पर चले तभी क्षेत्र में शांति स्थापित होगी।
’नरेंद्र कुमार शर्मा, भुजडू, हिप्र

चुनावी लालच

बिहार चुनाव के बाद हैदराबाद के नगर निगम चुनाव प्रचार में भाजपा नेताओं का कहना है कि कोरोना का टीका सबसे पहले मुफ्त में हैदराबाद में दिया जाएगा। मानो टीका कोई दवाई नहीं, प्रसाद हो। कोरोना से सारी दुनिया भयाक्रांत है। इसका बार-बार राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस प्रकार का चुनावी लालच परोसना ठीक नहीं है।

सरकार को यह कहना चाहिए कि पूरे देश को मुफ्त में ही टीका दिया जाएगा। केंद्र सरकार पूरे देश की जनता के प्रति जवाबदेह है, न कि जहां चुनाव हो रहे हैं, केवल वहां की जनता के प्रति। कोरोना के टीके को चुनाव प्रचार का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
’हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन, मप्र

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