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कोयले की कालिख

कोयला घोटाले में मनमोहन सिंह भी आरोपी बनाए गए हैं। मनमोहन सिंह की जीवनी पढ़ कर और उनकी सादगी देख कर इस बात पर भरोसा नहीं होता कि वे किसी भी अनैतिक काम में शामिल रहे होंगे। सीबीआई द्वारा उनका नाम हटाने के अनुरोध के बावजूद विशेष अदालत ने महसूस किया है कि इस मामले […]

Author March 18, 2015 9:00 PM
मनमोहन सिंह की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि प्रधानमंत्री के पास पूर्ण शक्तियां होती हैं और उनके प्रशासनिक फैसलों को गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता।

कोयला घोटाले में मनमोहन सिंह भी आरोपी बनाए गए हैं। मनमोहन सिंह की जीवनी पढ़ कर और उनकी सादगी देख कर इस बात पर भरोसा नहीं होता कि वे किसी भी अनैतिक काम में शामिल रहे होंगे। सीबीआई द्वारा उनका नाम हटाने के अनुरोध के बावजूद विशेष अदालत ने महसूस किया है कि इस मामले में अभी और जांच की जरूरत है। इस प्रकरण से मनमोहन सिंह कैसे बरी होंगे यह तो समय ही बताएगा।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर लगे आरोपों के बारे में इस समय कोई राय देना न्यायप्रक्रिया में दखलंदाजी होगी। इसी तरह एक खबर यह पढ़ी कि डीपी यादव को हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सुनाई गई है। हालांकि डीपी यादव के बारे में सुन कर या पढ़कर कोई आश्चर्य नहीं हुआ। मनमोहन सिंह और डीपी यादव के अपराध या उनकी पृष्ठभूमि पर बहस हो सकती है पर जहां तक न्याय का सवाल है, कानून का सवाल है तो न्यायपालिका ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी नजर में सब समान हैं। कोई कितना ही बड़ा व्यक्ति हो, कानून के पंजे से बच नहीं सकता। अंतत: पकड़ में आ ही जाता है।

जहां तक कोयला घोटाले की बात है तो यह प्राकृतिक संसाधनों की लूट की एक ऐसी मिसाल है कि जिन लोगों को बहूमूल्य संसाधनों के संरक्षण के लिए रखा गया था उन्होंने अपना दायित्व ढंग से नहीं निभाया। उन्होंने व्यक्तिगत स्वार्थ की खातिर ऐसे लोगों को कोल ब्लॉक का आबंटन किया जिनका इस क्षेत्र विशेष से दूर तक का कोई रिश्ता नहीं रहा। जिन एजेंसियों को कोयला आबंटित हुआ उन्होंने जमीन पर कुछ नहीं किया।

कुल बत्तीस आबंटनों में से तीन में काम हुआ। असल में हुआ यह कि राजनीतिक गलियारों में भ्रमण करने वाले ‘विशिष्ट’ वर्ग ने भ्रष्ट तंत्र से सांठगांठ करके कोल ब्लॉक तो हथिया लिए लेकिन अनुभव के अभाव में उनके द्वारा अपेक्षित परिणाम नहीं दिए जा सके। कोयले का सबसे अधिक उपयोग बिजली उत्पादन में किया जाता है। कोयला न निकलने के कारण बिजली उत्पादन नहीं हुआ। बिजली की दिन-प्रतिदिन बढ़ती मांग ने कोयले को चर्चा में ला दिया। आज कोयले से पचास फीसद से अधिक वाणिज्यिक ऊर्जा की पूर्ति होती है। बिजली उत्पादन के न होने से एक संकट की स्थिति पैदा हो गई। वैसे भी कोयला उत्पादन का मसला 2003 से ज्यादा चर्चा में आया जब अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने मिशन की घोषणा की कि 2012 तक सबको बिजली मुहैया कराई जाएगी।

पूर्व सीएजी विनोद राय की डायरी यूपीए सरकार के कई घोटालों के साथ-साथ कोयला घोटाले से संबंधित एक प्रामाणिक दस्तावेज है। इस डायरी में झांकने पर पता चला जाएगा कि मनमोहन सिंह किसी साजिश में शामिल हैं या नहीं। वैसे इस प्रकरण में यह सबसे चिंताजनक पहलू रहा है कि प्रधानमंत्री के नाते मनमोहन सिंह के किसी विषय पर दृढ़ता न दिखाए जाने के कारण, ‘स्टेंड’ न लेने के कारण प्रशासन पर उनकी पकड़ कमजोर हो गई और फिर कभी गठबंधन के साथियों ने तो कभी अपनों ने लूट मचाई। सरकार या घर किसी एक नियम पर चलता है।

जब एक बार प्रधानमंत्री ने यह तय कर दिया कि अब आगे से ‘पहले आओ पहले पाओ’ के सिद्धांत पर ही निर्णय लिया जाएगा तो फिर उसमें बार-बार बदलाव क्यों? जब चेहरा देख कर निर्णय किए जाने लगें तो उसमें चूक की पूरी संभावना है। ‘छानबीन समिति’ और ‘पहले आओ पहले पाओ’ दोनों तरीकों से काम चलने के कारण एक स्थान पर नियंत्रण छूट गया!

यतेंद्र चौधरी, नई दिल्ली

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