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धूमिल छवि

सोचा नहीं था कि मध्यप्रदेश के नेता अपने प्रदेश की छवि को इतना धूमिल कर देंगे। किसी वायरस की तरह पनप रहे इस राजनीतिक वितंडतावाद ने समाज को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। ‘हमने बहुत किया है, हम ही कर सकते हैं, हम फिर से बहुत करेंगे’- कुछ इन्हीं पंक्तियों से जनता […]

Author August 14, 2015 8:46 AM

सोचा नहीं था कि मध्यप्रदेश के नेता अपने प्रदेश की छवि को इतना धूमिल कर देंगे। किसी वायरस की तरह पनप रहे इस राजनीतिक वितंडतावाद ने समाज को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। ‘हमने बहुत किया है, हम ही कर सकते हैं, हम फिर से बहुत करेंगे’- कुछ इन्हीं पंक्तियों से जनता को रिझाने वाले कथित जनप्रतिनिधि इस हद तक गिर जाएंगे, ऐसा कभी जनता ने भी नहीं सोचा था।

धीरे-धीरे घोटालों की खान बनता जा रहा मध्यप्रदेश आज सारे देश में शर्मसार हो रहा है। हर तरफ सिर्फ अपराधियों का बोलबाला है। सफेदपोश माफिया-राजनीति करने वालों को समाज या राष्ट्रहित की तनिक भी चिंता नहीं है। वे समाज के हितैषी बनने का सिर्फ ढोंग कर रहे हैं।

जहां व्यापमं ने मध्यप्रदेश को सारे विश्व में कलंकित कर दिया है, वहीं कोयला घोटाला, डी-मैट घोटाला, मुख्यमंत्री की पर्चियों पर सीधे विश्वविद्यालय में नियुक्ति आदि ने भी इसकी छवि धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सारे प्रदेश में अपराध का राजनीतिकरण और राजनीति का अपराधीकरण दोनों ही प्रक्रियाएं लंबे समय से प्रचलन में हैं। सवाल है कि क्या इन आपराधिक घोटालों से प्रदेश को कभी निजात मिलेगी या ये ऐसे ही बढ़ते रहेंगे? क्या मध्यप्रदेश की धूमिल हुई छवि कभी साफ हो पाएगी?

पंकज कसरादे, मुलताई मध्यप्रदेश

 

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