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चौपालः शिक्षक के प्रति

हर साल शिक्षक दिवस पर स्कूल-कॉलेजों में शिक्षकों की महिमा गाई जाती है लेकिन लगता है कि सरकार के लिए वे बंधुआ कामगार से ज्यादा कुछ नहीं हैं।

Author September 5, 2018 2:09 AM
प्रतीक के तौर पर चित्र का इस्तेमाल किया गया है

शिक्षक के प्रति

हर साल शिक्षक दिवस पर स्कूल-कॉलेजों में शिक्षकों की महिमा गाई जाती है लेकिन लगता है कि सरकार के लिए वे बंधुआ कामगार से ज्यादा कुछ नहीं हैं। शिक्षकों का गुणगान करने वाले अपने देश की तल्ख हकीकत यह है कि कहीं स्कूली शिक्षक जनगणना करने में लगा दिए जाते हैं तो कहीं सरकार के किसी सर्वे के लिए वे गली-गली घूमकर आंकड़े जुटाने का काम कर रहे होते हैं। इस सबके बीच उन पर स्कूल का वार्षिक परीक्षा परिणाम भी सुधारने की जिम्मेदारी होती है। देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इस समय शिक्षकों के लगभग तैंतीस फीसद पद खाली पड़े हैं। आइआइटी जैसे महत्त्वपूर्ण संस्थानों तक में अध्यापकों के 34 फीसद पद खाली हैं। ओलंपिक खेलों में हम पदकों की उम्मीद रखते हैं, पर ज्यादातर स्कूलों में बच्चों के खेलने के लिए मैदान तक नहीं हैं। जो देश ‘सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल’ तैयार करने के लिए जाना जाता है, उसके ज्यादातर ग्रामीण इलाके के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर लैब तक नहीं बनीं।

आज की शिक्षा व्यवस्था से देश की साक्षरता दर जरूर बढ़ी है, लेकिन बच्चे स्कूल और कॉलेज से रोबोट बन कर निकल रहे हैं। शिक्षा के प्रति उदासीन रवैए को देखकर भारत को वर्तमान समय में विश्वगुरुकहना उचित नहीं होगा। अगर भारत को हमें सही मायनों में विश्वगुरु बनाना है तो जरूरी है कि सबसे पहले गुरु के मन की बात को समझें, जिसके भरोसे हम यह सपना देख रहे हैं। आज के दिन हमें ऐसे गुरुओं को वाकई नमन करना चाहिए जो अपना दुख-दर्द दिल में समेटे हुए लगातार भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए जी-जान से मेहनत कर रहे हैं।

रोहित यादव, एमडी यूनिवर्सिटी, रोहतक

नोटबंदी का हासिल

इस आधार पर कि एक हजार और पांच सौ रुपए के 99.3 प्रतिशत नोट रिजर्व बैंक में वापस लौट आए, नोटबंदी को विफल घोषित कर देना किसी प्राथमिक पाठशाला के स्तर की समझ रखने जैसा है। 18 लाख लोग, जिन्होंने पांच लाख करोड़ रुपए बैंकों में जमा कराए (यानी प्रत्येक ने औसतन 28 लाख रुपए जमा कराए) और जो आयकर की जांच के घेरे में आए हुए हैं, उनकी जांच के परिणाम अभी आने बाकी हैं। नोटबंदी के कारण सिस्टम में जो रुपया लौटा और जो अब तक भू-संपत्ति में लगा हुआ था, उसके कारण प्रॉपर्टी सस्ती हुई। गरीब व्यक्ति अब संपत्ति-स्वामी बन पा रहा है। ब्याज दर औसतन 150 ‘बीपीएस’ कम हो सकी है। इस कारण उत्पादक क्षेत्र को सस्ते कर्ज का लाभ भी अब दिखने लगा है। जीडीपी आठ फीसद पार पहुंच रही है। एक करोड़ नए ईपीएफ और ईएसआइसी खाते खुलना भी बड़ी बात है।

काले धन पर अब तक जो सफलता हासिल हुई, उसे भी जानना चाहिए। आय घोषणा योजना में 65,250 करोड़ की आय घोषित हुई। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में 4,900 करोड़ रुपए सरकार को प्राप्त हुए। 42,448 करोड़ की अघोषित आय लोगों ने स्वत: सरकार को बताई। 33,028 करोड़ की अघोषित आय सरकार ने पकड़ी। सब मिलाकर अब तक 2,12,360 करोड़ का कालाधन जब्त किया जा चुका है जबकि पांच लाख करोड़ की जांच आयकर विभाग कर रहा है। कालेधन को खपाने के लिए बनाई गर्ईं 35,000 कंपनियां समाप्त की जा चुकीं, 2.1 लाख अपंजीकृत की गर्इं और 1.2 लाख जांच के घेरे में हैं। इनके 3.09 लाख निदेशक अपात्र घोषित किए जा चुके हैं। इतना कुछ नोटबंदी के कारण हासिल हुआ, लेकिन बंद आंखों को कुछ नहीं दिख रहा।

अजय मित्तल, मेरठ

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