ताज़ा खबर
 

जाटलैंड का दंगल

12 मई को हरियाणा में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। इस चुनाव में अच्छी बात यह है कि प्रदेश की राजनीति किसी विशेष जाति के समीकरण से बाहर निकल रही है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

बारह मई को हरियाणा में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। प्रदेश की सभी दस सीटों पर पार्टियों ने उम्मीदवार उतार दिए है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि कई राजनेता चुनाव से पहले वोट की खातिर राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा के आश्रम तक में पहुंच रहे हैं। प्रदेश की राजनीति में इस बार कई नए चेहरे किस्मत आजमा रहे हैं। देखना दिलचस्प रहेगा कि क्या हरियाणा की जनता इस बार नए चेहरों पर भरोसा करेगी या उनकी घर वापसी करवा देगी। इस चुनाव में अच्छी बात यह है कि प्रदेश की राजनीति किसी विशेष जाति के समीकरण से बाहर निकल रही है। देखना होगा कि साख की इस लड़ाई में जनता किसे कुर्सी पर बैठने का मौका देगी और किसे विपक्ष नसीब करेगी।
’रोहित यादव, महर्षि दयानंद विवि, रोहतक

रेबीज का खतरा
हाल ही में जारी किए गए ‘नेशलन हेल्थ प्रोफाइल 2018’ के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में जापानी इनसेफेलाइटिस और स्वाइन फ्लू की तुलना में रेबीज ही एक ऐसी बीमारी रही है जिसके कारण मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रही। रेबीज से होने वाली मौतों का यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है। वश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक वैश्विक दस प्रमुख संकटों की सूची में रेबीज वायरस द्वारा होने वाला संक्रमण भी शामिल है। इस दिशा में पहला काम कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण को लेकर किया जाना है। इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों व नगरीय निकायों को पर्याप्त अधिकार दिए गए हैं। लेकिन समुचित प्रशिक्षण के अभाव, पैसे की कमी और इच्छाशक्ति की कमी के कारण ऐसी योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पातीं।
’ऋषभ देव पांडेय, कोरबा, छत्तीसगढ़

सरकार और जिम्मेदारी
दिनोंदिन बढ़ रही जनसंख्या के साथ-साथ नौकरियों की संख्या बढ़ने की भी जरूरत थी। लेकिन सरकार में तो कई प्रकार के पद ही समाप्त कर दिए गए। ऐसा कदम तो कल्याणकारी राज्य के स्थान पर पूंजीवादी व्यवस्था की ओर बढ़ने का संकेत है। लोगों की बुनियादी आवश्यकताओं में शामिल शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा के संदर्भ में सरकारी नियंत्रण कम से कम होता जा रहा है। दूसरी ओर व्यक्ति अपने जीवन पर राज्य का कम से कम हस्तक्षेप तो चाहता है, लेकिन जीवन रक्षा के संदर्भ में राज्य से उसकी प्रासंगिकता की मांग करती है। राज्य और सरकार का निर्माण इसलिए हुआ ताकि वह जनता के टैक्स के बदले उसको न केवल स्वतंत्रता और सुरक्षा देगी, बल्कि विकास के तमाम अवसर मुहैया करा कर व्यक्ति के अस्तित्व संवर्धन के साथ-साथ सर्वांगीण विकास में मददगार होगी। लेकिन हकीकत के धरातल पर जनसंख्या के अनुपात में सरकार शिक्षक भी मुहैया नहीं कराती, जिसका परिणाम आधे-अधूरे विकास के रूप में सामने आता है। इसी तरह जनसंख्या के अनुपात में चिकित्सकों की बहाली नहीं की जाती। जबकि दिनों दिन बीमार और बीमारियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। इसके अलावा सुरक्षा हेतु पुलिस प्रशासन की स्थापना की गई, लेकिन आम लोगों के मन में पुलिस के प्रति कैसी कैसी छवि है, यह जगजाहिर है।
’मिथिलेश कुमार, भागलपुर

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 अजहर पर शिकंजा
2 बढ़ते साइबर अपराध
3 नफरत के विरुद्ध
ये पढ़ा क्या?
X