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चौपाल: वक्त का तकाजा

कोई कुछ भी कहे, देश की हालत आज हर क्षेत्र में विशेषकर बढ़ती जनसंख्या और बेरोजगारी से बहुत ही खराब और चिंताजनक होती गई है और अन्य कई कारणों से यह निरंतर बिगड़ती ही जा रही है। वामपंथी दलों के बाद असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआइएमआइएम ने भी पांच सीटें जीत कर अन्य छोटे दलों से बेहतर प्रदर्शन किया है।

बिहार के चुनाव में अन्य दलों की अपेक्षा वामपंथी दलों, यथा भाकपा (माले) ने बारह, भाकपा ने दो और माकपा ने भी दो सीटें यानी कुल चौदह सीटें जीत कर अच्छा प्रदर्शन किया है। इससे उनके भविष्य में आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है, बशर्ते ये दल अपने निहित स्वार्थ छोड़ कर और अब एक होकर जनवादी ठोस कार्यक्रमों के लिए आगे आएं। तभी ये अपने अमूल्य सिद्धांत को लेकर आगे बढ़ सकते हैं।

कोई कुछ भी कहे, देश की हालत आज हर क्षेत्र में विशेषकर बढ़ती जनसंख्या और बेरोजगारी से बहुत ही खराब और चिंताजनक होती गई है और अन्य कई कारणों से यह निरंतर बिगड़ती ही जा रही है। वामपंथी दलों के बाद असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआइएमआइएम ने भी पांच सीटें जीत कर अन्य छोटे दलों से बेहतर प्रदर्शन किया है।

अगर वे भी संगठित वामपंथियों के साथ नए और पारदर्शी कार्यक्रम के साथ मिल जाएं तो एक नया वैकल्पिक समीकरण खड़ा हो सकता है। जनता ने बड़े संकट में इन्हें कुछ बेहतर समझा है। सही, नैतिक और पारदर्शी संगठन में ही शक्ति है। देश में नकारात्मक राजनीति करने वालों के मुकाबले एक बेहतर विकल्प की जरूरत तत्काल है।
’वेद मामूरपुर, नरेला, दिल्ली

हमारी जिम्मेदारी

हमारा देश जो सारी दुनिया में प्रकृति प्रधान और शस्य श्यामला वसुंधरा के सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, उसकी छवि को हमने अपने स्वार्थ के लिए प्रदूषण बढ़ा कर खराब करने का काम किया है। सरकारों की गलत नीतियां प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन क्या हम खुद प्रदूषण से होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए इसकी रोकथाम के लिए कुछ प्रयास नहीं कर सकते?

दिल्ली सरकार की ओर से प्रदूषण को कम करने के मद्देनजर जब गाड़ियों को सड़क पर चलाने के लिए ईवन-आॅड प्रणाली शुरू किया जाता है, तब उसका विरोध क्यों किया जाता है। दरअसल, हम सफर के लिए अपनी सहूलियत देखते हैं और सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग करना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं।

जिस तरह देश में प्रदूषण सिरदर्द बनता जा रहा है, उसके लिए तो हमेशा जागरूकता अभियान चलना चाहिए। पिछले कुछ सालों से प्रदूषण का कारण पराली जलाना भी बताया जाने लगा है और इससे निपटने के लिए कुछ लोग यह सलाह देते हैं की किसानों को धान की जगह अन्य फसलें उगानी चाहिए। वे भूल जाते हैं कि किसी फसल की खेती बंद करना इस समस्या का समाधान नहीं है।
’राजेश कुमार चौहान, जालंधर, पंजाब

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