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भीड़ का इंसाफ

मानवीय मूल्यों के क्षरण का एक गंभीर मसला भीड़-तंत्र बन चुका है।

Author Published on: July 3, 2017 5:33 AM
साहा ने कहा कि जो भी यह अफवाह फैला रहा है उसे बक्शा नहीं जाएगा और आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

भीड़ का इंसाफ
इन दिनों सड़कों पर भीड़ के बर्बर ‘इंसाफ’ करने की बढ़ती घटनाएं चिंता का सबब बन गई हैं। मानवीय मूल्यों के क्षरण का एक गंभीर मसला भीड़-तंत्र बन चुका है। विभिन्न क्षेत्रों की महत्त्वपूर्ण हस्तियां सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित कराने के लिए सोशल साइट्स आदि माध्यमों से जनांदोलन कर रही हैं। कुछ मामलों में भीड़ के कार्य ऐसे हैं कि गांव में लोग घरों को आग में झोंक कर तमाशा देखें, तालियां बजाएं! अनेक जगहों पर तत्काल न्याय के नाम पर क्रूर घटनाएं हुई हैं। ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक गणराज्य को चुनौती दे रही हैं और संवैधानिक न्याय का मजाक बना रही हैं। इन्हें हर हाल में रोका जाना चाहिए।
’चंद्रकांत, एएमयू, अलीगढ़
कृषि और मानसून
भारत की लगभग साठ प्रतिशत आबादी अब भी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। भारत की कृषि में वर्षा का यानी अच्छे व समय से आए मानसून का बहुत महत्त्व है। इस साल समय से मानसून आना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।  भारत विश्व के उन गिने-चुने देशों में एक है जहां अच्छी बारिश होती है। इसके बावजूद कई दशकों से, तकनीकी व आर्थिक प्रगति के बावजूद भारत में वर्षा जल के सही प्रबंधन का अभाव देखा जा सकता है। हर साल बाढ़ व सूखे से देश के कई राज्य एक साथ जूझते हैं। बाढ़ व सूखे से निपटने के लिए बहुत-सी योजनाएं बनाई गई हैं, इसके बावजूद हर साल इन आपदाओं के चलते बड़ी मात्रा में जान-माल की हानि होती है।

वर्षा जल का सही प्रयोग देश की अर्थव्यवस्था में काफी योगदान दे सकता है। भारत को अपनी विशेष स्थिति का गहनता से लाभ उठाने के लिए वर्षा जल का सर्वोत्तम तरीके से प्रबंधन करना चाहिए। भारत इस संदर्भ में इजराइल से काफी सीख ले सकता है जहां बहुत सीमित वर्षा होती है। इजराइल ने वर्षा जल प्रबंधन की नवाचारी, वहनीय तकनीक विकसित की है। आशा की जानी चाहिए कि भारत इस सदर्भ में पूर्व के सबक लेते हुए, इस गंभीर विषय में उचित कदम उठाएगा।
’आशीष कुमार, उन्नाव, उत्तर प्रदेश

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