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चौपाल : थोड़ा इंतजार, जागने का समय, ईवीएम राग, थोड़ा इंतजार

सवालों की झड़ी-सी लग गई है। उनके पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं। टीवी चैनल उनकी कट्टर हिंदूवादी की छवि प्रसारित कर रहे हैं।

Author March 27, 2017 6:02 AM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ (File Photo)

थोड़ा इंतजार

जब से योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं, सवालों की झड़ी-सी लग गई है। उनके पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं। टीवी चैनल उनकीकट्टर हिंदूवादी की छवि प्रसारित कर रहे हैं। उनके कामों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन सोचने वाली बात है कि क्या उन्हें एक मौका नहीं मिलना चाहिए? गोरखपुर की जनता ने उन पर विश्वास किया तभी तो इतने वर्षों तक वे सांसद रहे। क्या उनका हिंदू या भगवाधारी होना उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए पर्याप्त है? हमें नहीं भूलना चाहिए लोकतंत्र जिन कंधों पर खड़ा है, वे कंधे जनता के हैं। जिस दिन जनता को योगी से परेशानी होगी वह स्वयं उन्हें बाहर का रास्ता दिखा देगी।
शिल्पा जैन सुराणा, वरंगल, तेलंगाना

जागने का समय

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का 26 नवंबर 1946 को संविधान सभा में व्यक्त यह विचार अविस्मरणीय है और अपनी सार्थकता सिद्ध करता प्रतीत होता है कि ‘किसी देश को वही सरकार मिल सकती है जिसकी वह हकदार है’। आज हम अगर सांप्रदायिक हैं तो एक ऐसी सरकार चुनेंगे जो हमारी मनोभावनाओं और इच्छाओं की पूर्ति करे। लेकिन ऐसा करते समय नहीं भूलना चाहिए कि हमारे देश में संविधान सर्वोच्च है और यहां किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि कानून का राज होता है। धीरे-धीरे यह प्रभाव पूरी दुनिया, जिससे कि हमारा देश भी बचा नहीं है; में होता जा रहा है कि एक व्यक्ति ही सर्वोच्च है।

हम स्वयं उस व्यक्ति को तानाशाह बनते देखना चाहते हैं। ऐसे समय में जरूरत है जागरूक विद्वानों, लेखकों, पत्रकारों और प्रज्ञावान शिक्षकों की, जो अपने आसपास की जनता, दर्शकों, पाठकों या विद्यार्थियों में यह भाव पैदा कर सकें कि- ‘जागृत होने का समय आ चुका है, अपने अमूल्य मत के प्रयोग की महत्ता को जानो, प्रचलित कानूनों से सीखो और देश में तानाशाही को बढ़ावा देकर ‘कानून का शासन’ और संविधान की सर्वोच्चता’ स्थापित करने का अथक प्रयास करें’। तभी सही अर्थों में लोकतंत्र सुरक्षित रह पाएगा।
पुष्पेंद्र सिंह राजपूत, वायु सेना स्टेशन, आगरा
ईवीएम राग

यह सच है कि किसी को उम्मीद नहीं थी कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को 325 सीटें मिल सकती हैं। अब जब जनादेश आया है तो उसे सबको स्वीकार करना चाहिए, लेकिन हारी हुई पार्टी बसपा ईवीएम में गड़बड़ी की बात कहते हुए फिर से चुनाव कराने की मांग कर रही है। उसे अपनी हार हजम नहीं हो रही है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2007 में यूपी में 206 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया था, उसके बाद 2012 में सपा ने 224 सीटें जीतीं और उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई। इसी कड़ी में 2015 में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 70 में से 67 सीटें जीत कर सबको हैरान कर दिया। कांग्रेस ने इस बार पंजाब विधानसभा चुनाव में 117 में से 77 सीटें जीत कर बहुमत हासिल किया। गौरतलब है कि इन सभी पार्टियों ने ये भारी बहुमत उसी ईवीएम से हासिल किए हैं जिस पर वे सवाल उठा रही हैं और फिर से चुनाव कराने की मांग कर रही हैं। सरकार को इन पार्टियों की बात मान लेनी चाहिए और फिर से चुनाव करवाने का खर्च भी इन्हीं पार्टियों से वसूला जाना चाहिए। इससे साफ हो जाएगा कि कौन-सी पार्टी ईवीएम का सच में विरोध करती है और कौन नाटक कर रही है।
सुकांत तिवारी, दिल्ली

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- ''भाजपा बिना पक्षपात के समाज के सभी वर्गों के भलाई के लिए काम करेगी''

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