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चौपाल: त्रासदी के तमाशबीन

हम सभी का नैतिक कर्तव्य है कि संकट के समय मदद के लिए हाथ बढ़ाएं। मोबाइल तकनीक का उपयोग मानव हित में होना चाहिए।

Author Published on: February 18, 2020 12:11 AM
पीड़ित की मदद करने की बजाए लोग फोटो शूट करते हैं (फाइल फोटो)

बालेसर (जोधपुर) और जयपुर में पटाखे की दुकान में भीषण आग के दौरान लोग वीडियो बनाते और सेल्फी लेते रहे। यह इस किस्म की कोई पहली घटना नहीं है। किसी सड़क दुर्घटना में भी लोग मदद करने की बजाय सेल्फी लेते या वीडियो बनाते देखे जाते हैं। सोचें, अगर अपने परिजन होते तो…? ऐसे समय में तमाशा देखना उचित नहीं है। हम सभी का नैतिक कर्तव्य है कि संकट के समय मदद के लिए हाथ बढ़ाएं। मोबाइल तकनीक का उपयोग मानव हित में होना चाहिए।
’पारस मल बोस, गुडामलानी, बाड़मेर

चुनाव से दूर
दागी लोगों को संसद और विधानसभाओं से दूर रखने का उचित उपाय तो यही है कि उन्हें चुनाव लड़ने की सुविधा ही न दी जाए। निर्वाचन आयोग एक अरसे से कह रहा है कि उन लोगों को चुनाव लड़ने से रोका जाए जिनके खिलाफ ऐसे संगीन मामले चल रहे हों जिनमें पांच साल से अधिक की सजा हो सकती है और जिनमें आरोप पत्र भी दायर हो चुका हो। अच्छा होता कि सुप्रीम कोर्ट इस उपाय को अपने दिशा-निर्देशों का हिस्सा बनाता या फिर चुनाव आयोग को यह अधिकार देता कि वह राजनीतिक दलों की उन कमजोर दलीलों को ठुकरा सकता है जो वे किसी दागी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने के मामले में दें।
’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर

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