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सजप का विलय नहीं

जनसत्ता के तीन मार्च के अंक में पुण्य प्रसून वाजपेयी के विश्लेषण ‘यह राजनीति से निकला जनादेश है, कोई मजमा नहीं’ के दूसरे पैरा के अंत में लिखा है, ‘एनएपीएम से लेकर समाजवादी जन परिषद और तमिलनाडु में परमाणु संयंत्र का विरोध कर रहे समाजसेवियों से लेकर गोवा में आदिवासियों के हक का सवाल उठा […]

जनसत्ता के तीन मार्च के अंक में पुण्य प्रसून वाजपेयी के विश्लेषण ‘यह राजनीति से निकला जनादेश है, कोई मजमा नहीं’ के दूसरे पैरा के अंत में लिखा है, ‘एनएपीएम से लेकर समाजवादी जन परिषद और तमिलनाडु में परमाणु संयंत्र का विरोध कर रहे समाजसेवियों से लेकर गोवा में आदिवासियों के हक का सवाल उठा रहे संगठन भी आप में शामिल हो जाते हैं’।

यहां मैं यह जानकारी देना चाहता हूं कि समाजवादी जन परिषद का गठन 1 जनवरी 1995 को ठाणे में हुआ था और तब से वह निरंतर समाजवादी विचारों पर आधारित नई वैकल्पिक राजनीति की दिशा में अग्रसर है। अण्णा आंदोलन का इस पार्टी ने समर्थन किया और उसके बाद गठित आम आदमी पार्टी का स्वागत किया। लेकिन कभी भी समाजवादी जनपरिषद राष्ट्रीय स्तर पर या किसी इकाई के स्तर पर आप में शामिल नहीं हुई। समाजवादी जन परिषद के बारे में भ्रामक तथ्य दिए जाने से उसकी छवि को धक्का लगा है। कृपया तथ्य को सुधार कर सही जानकारी दें।

अतुल कुमार, अध्यक्ष, समाजवादी जन परिषद, दिल्ली इकाई

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