ताज़ा खबर
 

पढ़ाई और खेल

अगर छात्रों में प्रारंभिक स्तर से पढ़ाई के साथ देश के प्रति अपने कर्तव्यों की समझ विकसित की जा सके तो यकीनन हमारी बड़ी उपलब्धि होगी। इस संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के विचार हमें रास्ता दिखाते हैं। उन्होंने कहा था कि गीता समझने से बेहतर है कि फुटबाल के मैदान में अपना पसीना बहाओ। इससे […]

Author August 4, 2015 1:41 AM

अगर छात्रों में प्रारंभिक स्तर से पढ़ाई के साथ देश के प्रति अपने कर्तव्यों की समझ विकसित की जा सके तो यकीनन हमारी बड़ी उपलब्धि होगी। इस संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के विचार हमें रास्ता दिखाते हैं। उन्होंने कहा था कि गीता समझने से बेहतर है कि फुटबाल के मैदान में अपना पसीना बहाओ। इससे तुम्हें गीता के उपदेश को आत्मसात करने में आसानी होगी।

तात्पर्य यह कि खेल ऐसा माध्यम है जिससे शरीर का ही विकास नहीं होता, बल्कि उससे अनुशासन में रहने की आदत बनती है। अफसोस की बात है कि आज स्कूलों से खेल गायब हो चुके हैं। अब वे ही छात्र खेल को प्राथमिकता देते हैं जिनके अभिभावक ऐसा चाहते हैं। चूंकि खेल से विशिष्ट पहचान के साथ बेशुमार दौलत हासिल की जा सकती है, इसलिए व्यावसायिक रूप में खेलने वालों की संख्या बढ़ी है।
धर्मेंद्र दुबे, वाराणसी

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App