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आत्ममुग्धता की उड़ान

लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने राहुल गांधी को ठीक समय पर, ठीक बात पर रोका-टोका। राहुल गांधी की बातों से लग रहा था कि वे नरेंद्र मोदी को ‘केवल भाजपाइयों का प्रधानमंत्री’ मान रहे हैं और वैसा ही साबित करने की कोशिश भी कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों का […]

Author April 27, 2015 12:41 pm

लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने राहुल गांधी को ठीक समय पर, ठीक बात पर रोका-टोका। राहुल गांधी की बातों से लग रहा था कि वे नरेंद्र मोदी को ‘केवल भाजपाइयों का प्रधानमंत्री’ मान रहे हैं और वैसा ही साबित करने की कोशिश भी कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों का कहना था कि राहुल उन्हें (नरेंद्र मोदी को) ‘भारत का प्रधानमंत्री’ के रूप में उल्लेखित करें।

राहुल गांधी ने आपत्ति कबूल तो कर ली, लेकिन सवाल पूछते हुए कि क्या भाजपाई मोदी को अपना प्रधानमंत्री नहीं मानते? हम एक आदर्श अनुप्रेरित समाज हैं। इसीलिए हम, ‘जो हो रहा है’ उसके मुकाबले ‘जो होना चाहिए’ को महत्त्व देने का कोई मौका नहीं छोड़ते। हम खुद तो राम नहीं बनते, लेकिन राम की दुहाई देने में कोई कसर नहीं छोड़ते। राहुल गांधी और लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य- दोनों ही सच नहीं कह रहे हैं। राहुल गांधी ने अधूरा सच कहा और भाजपाई सदस्य घिसी-पिटी लीक पर चले। हकीकत कुछ और ही है।

नरेंद्र मोदी का पूरा ध्यान, सारी कोशिशें, सारे उपक्रम, सारी उठापटक खुद को स्थापित करने और खुद को केंद्र में बनाए रखने की होती है। ताजा यूरोप प्रवास में उन्होंने जिस सहजता और आत्मविश्वास से अपने भारतीय पूर्ववर्तियों को ‘गंदगी फैलाने वाले’ और खुद को सफाई करने वाला घोषित किया उसके बाद किसी को कोई उलझन नहीं होनी चाहिए। वे चरम तक आत्म-मुग्ध अनुभव होते हैं। लगता है, खुद को स्थापित करने के लिए वे सबको एक झटके में, एक साथ विलोपित (विस्थापित नहीं) कर देना चाह रहे हैं। सारी दुनिया को पता था कि वे भारत सरकार के खर्चे पर, भारतीय प्रधानमंत्री की हैसियत से प्रवास पर थे।

लेकिन यह तथ्य अगर किसी को याद नहीं था तो केवल नरेंद्र मोदी को याद नहीं था। खुद को ‘ऐसा पहला प्रधानमंत्री’ साबित करने के लिए वे किसी भी सीमा तक जाने को उतावले लगते हैं। इसी आत्म-मुग्धता के अधीन उन्होंने खुद को भारत का ही नहीं, दुनिया का ऐसा पहला प्रधानमंत्री बना लिया, जिसने विदेशों में अपने ही देश की स्थापित छवि और राष्ट्र प्रमुखों के स्थापित आचरण पर प्रश्नचिह्न लगा दिया।

नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं। यह एक संवैधानिक सत्य है और उनका भारतीय जनता पार्टी का प्रधानमंत्री होना ‘भारतीय राजनीतिक सत्य’ है। लेकिन नरेंद्र मोदी इन दोनों ही तथ्यों को अधूरा साबित करने की कोशिशें करते लगते हैं। उनकी आत्म-मुग्धता उन्हें ‘खुद का प्रधानमंत्री’ निरूपित करती लगती है और कोशिशों से लगता है कि वे खुद को ‘सारी दुनिया का प्रधानमंत्री’ साबित करने की जुगत में हैं।

राहुल गांधी राजनीतिक तथ्य बयान कर रहे हैं और लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य संवैधानिक तथ्य की याद दिला रहे हैं। और नरेंद्र मोदी? निश्चय ही वे दोनों की नादानी पर मुस्कराने के अधिकारी हैं।
विष्णु बैरागी, पत्रकार कॉलोनी, रतलाम

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