रिश्ते पर राजनीति

पिछले दिनों अमेरिका दौरे में जब नरेंद्र मोदी फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से बातचीत के दौरान अपनी मां का जिक्र करते हुए भावुक हुए तो कांग्रेस के कई नेताओं को यह नागवार गुजरा..

Author दिल्ली | October 9, 2015 2:06 AM

पिछले दिनों अमेरिका दौरे में जब नरेंद्र मोदी फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से बातचीत के दौरान अपनी मां का जिक्र करते हुए भावुक हुए तो कांग्रेस के कई नेताओं को यह नागवार गुजरा और उन्होंने एक सुर में मोदी को निशाने पर लेते हुए इसे नाटक करार दे दिया। क्या मां-बेटे के पवित्र रिश्ते पर राजनीति करना सही है? क्या कांग्रेस के पास मुद्दों की कमी है? क्या कांग्रेस को मोदी फोबिया हो गया है? मोदी के हर काम की बुराई करते-करते कांग्रेस के नेताओं ने मां-बेटे के प्यार पर भी राजनीति शुरू कर दी है।

सवाल कई हैं। क्या मां को याद करके बेटे की आंखों में आंसू नहीं आ सकते? इसमें आलोचना की क्या बात है? कई लोगों ने कांग्रेस की मानसिकता पर सवाल उठा दिए। रामकथा के मर्मज्ञ मोरारी बापू ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस से पूछा कि अगर मां को याद कर आंसू आ गए तो क्या हुआ? उनके मुताबिक देश में कई मुद्दे हैं जिन पर बहस हो सकती है।

हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि मां के नाम पर राजनीति हो रही हो। इससे पहले नरेंद्र मोदी भी राहुल गांधी को मां के नाम पर घेर चुके हैं। 2014 लोकसभा चुनाव से पहले जब कांग्रेस अधिवेशन में राहुल गांधी ने उपाध्यक्ष बनने के बाद भाषण में अपनी मां का जिक्र किया था तो नरेंद्र मोदी ने मजाक उड़ाया था। हालांकि वह एक अलग संदर्भ में था लेकिन मां के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मोहित सिंह, दिल्ली

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