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आरक्षण का दायरा

पटेल समुदाय गुजरात में व्यापारी वर्ग का बड़ा चेहरा माना जाता है। गुजरात में चालीस फीसद औद्योगिक क्षेत्रों में पटेल समुदाय काबिज है। गुजरात के अस्सी फीसद हीरा उद्योग पटेल समुदाय के पास है..

Author नई दिल्ली | Updated: August 31, 2015 2:58 PM

पटेल समुदाय गुजरात में व्यापारी वर्ग का बड़ा चेहरा माना जाता है। गुजरात में चालीस फीसद औद्योगिक क्षेत्रों में पटेल समुदाय काबिज है। गुजरात के अस्सी फीसद हीरा उद्योग पटेल समुदाय के पास है। गुजरात विधानसभा में चौवालीस विधायक और चार मंत्री पाटीदार (पटेल) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, यहां तक कि वहां की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल और राज्य भाजपा अध्यक्ष भी इसी समुदाय से आते हैं। हर लिहाज से देखा जाए तो पटेल समुदाय संपन्न है। हार्दिक पटेल के इस आंदोलन की शुरुआत चाहे जिस भी कारणों से हुई हो, लेकिन गुजरात का पटेल समुदाय उस पात्रता पर खरा नहीं उतरता, जिसके आधार पर उसे आरक्षण दिया जा सके।

किसी भी समस्या का समाधान हिंसा नहीं हो सकती। लगता है समय रहते राज्य प्रशासन और सरकार ने ध्यान नहीं दिया कि कैसे हार्दिक पटेल लोगों को गुमराह कर गोलबंदी कर रहा है। अब प्रशासन को चाहिए कि जो लोग सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का कार्य किए हैं उन्हें चिह्नित कर दंडित किया जाए। प्रशासन को इस बात की भी जांच करनी होगी कि आखिर अचानक पटेल समुदाय आंदोलित कैसे हो गया, कहीं इसके पीछे कोई अदृश्य राजनीति तो नहीं?

अगर समृद्ध पटेल समुदायों को आरक्षण दिया जाने लगे तो फिर इन जैसा हर वर्ग आरक्षण की मांग करेगा। वैसे भी जाट, मराठा आदि पहले से ही आरक्षण पाने के लिए संघर्षरत हैं। आरक्षण सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में रियायत देकर मुख्यधारा में लाने की व्यवस्था है।

यह सही समय है, जब आरक्षण की विसंगतियों को दूर करने पर विचार किया जाए, क्योंकि जहां सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े आरक्षण के लाभ से वंचित हैं, वहीं आरक्षित वर्गों के कुछ सक्षम समुदाय उसका पूरा लाभ उठा रहा है। इसे जल्द से जल्द सुलझाने की जरूरत है अन्यथा जितनी देर की जाएगी समस्या उतनी ही बढ़ेगी।
अवनिंद्र कुमार सिंह, दुर्गाकुंड, वाराणसी

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