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चौपाल: गारंटी के साथ

प्रो. स्टेंडिंग के अनुसार भारत में यूबीआई को लागू करने पर जीडीपी का तीन से चार प्रतिशत खर्च आएगा जबकि अभी कुल जीडीपी का चार से पांच प्रतिशत सब्सिडी में चला जाता है। उनके मुताबिक यूबीआई और सब्सिडी एक साथ नहीं चल सकते, इससे सरकार पर वित्तीय भार ज्यादा पड़ेगा।

Author February 12, 2019 5:50 AM
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। (फोटो सोर्स- Twitter File/@RahulGandhi)

कांग्रेस अध्यक्ष ने लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ा दांव चला है। उन्होंने कहा कि केंद्र में अगर उनकी सरकार बनती है तो गरीबों को न्यूनतम आय की गारंटी दी जाएगी। न्यूनतम आय की गारंटी एक तरह से सबको बुनियादी आय यानी यूनिवर्सल बेसिक इन्कम (यूबीआई) ही है जिसके तहत सरकार देश के गरीब लोगों को बिना शर्त एक तय रकम देती है। अगर यह योजना लागू होती है तो सरकार को देश के हर गरीब नागरिक को एक निश्चित राशि निश्चित अंतराल में देनी होगी। प्रो. स्टेंडिंग के अनुसार भारत में यूबीआई को लागू करने पर जीडीपी का तीन से चार प्रतिशत खर्च आएगा जबकि अभी कुल जीडीपी का चार से पांच प्रतिशत सब्सिडी में चला जाता है। उनके मुताबिक यूबीआई और सब्सिडी एक साथ नहीं चल सकते, इससे सरकार पर वित्तीय भार ज्यादा पड़ेगा। लिहाजा, सरकार को चरणबद्ध तरीके से सब्सिडी खत्म करनी होगी। यूबीआई को मध्यप्रदेश के एक गांव में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा चुका है जिसके परिणाम काफी अच्छे रहे हैं।

वैसे यूबीआई लागू करना इसलिए भी आवश्यक है कि देश में दिन-प्रतिदिन आर्थिक असमानता बढ़ती जा रही है। हाल ही में आई ऑक्सफेम इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के शीर्ष एक प्रतिशत अमीरों की संपत्ति 39 प्रतिशत बढ़ी जबकि आधी आबादी यानी 65 करोड़ लोगों की संपत्ति तीन फीसद बढ़ी। भारत में शीर्ष नौ अमीरों की संपत्ति 50 फीसद आबादी की संपत्ति के बराबर है। भारत में एक फीसद अमीरों के पास कुल संपत्ति का 51.53 फीसद हिस्सा है। दस प्रतिशत अमीरों के पास देश की कुल संपत्ति का 77.4 प्रतिशत हिस्सा है जबकि 60 फीसद आबादी के पास सिर्फ 4.8 प्रतिशत हिस्सा है। देश में जहां अमीरों की संपत्ति में तेजी से इजाफा हो रहा है वहीं निम्न और मध्यम वर्ग का घट रहा है।

अगर यूबीआई लागू करनी है तो सबसे पहले ऐसे लोगों की पहचान की जाए जो गरीबी रेखा के नीचे आते हैं। रंगराजन रिपोर्ट के अनुसार देश की लगभग 30 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के अंतर्गत आती है। लिहाजा, वास्तविक रूप से उसी को योजना का लाभ मिलना चाहिए। सरकार एक मापदंड तय करके निश्चित राशि लोगों के खाते में भेजे। आधार लोगों की वास्तविक स्थिति पता लगाने के लिए कारगार साबित हो सकता है। देश के सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को ऊपर उठाने में यूबीआई निश्चित ही कारगार साबित होगी, साथ ही इससे आर्थिक असमानता की गहरी होती खाई भी धीरे-धीरे पटेगी।
अमित पांडेय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

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