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चौपाल: तिरंगा और देशप्रेम

तिरंगे के तीन रंगों का इस दिन इतना उत्साह रहता है कि मिठाई की दुकानों में तिरंगे पेड़े और केक की दुकानो में तिरंगे केक की विशेष मांग रहती है। राष्ट्रध्वज का इस प्रकार हो रहा अनावश्यक उपयोग देख कर राष्ट्रध्वज कहीं शोभा की वस्तु तो नहीं बन रही, यह प्रश्न मन में आता है। राष्ट्रध्वज यह राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है।

Author January 26, 2019 3:59 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: pixabay)

वंदे मातरम कहें कि न कहें, राष्ट्रगीत के लिए खड़े हों या न हों, जैसे विषयों पर पूरे साल चर्चाएं चलती रहती हैं, लेकिन स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे मौकों पर देशवासियों का देशप्रेम उफान पर होता है। अपने देशप्रेम का परिचय देने के लिए जगह-जगह सेल्फी लेते हुए तिरंगे के रंग के कपड़े पहने हुए समूह फोटो अपलोड करना, चेहरे पर तिरंगे जैसा चित्र बनवा लेने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। तिरंगे के तीन रंगों का इस दिन इतना उत्साह रहता है कि मिठाई की दुकानों में तिरंगे पेड़े और केक की दुकानो में तिरंगे केक की विशेष मांग रहती है। राष्ट्रध्वज का इस प्रकार हो रहा अनावश्यक उपयोग देख कर राष्ट्रध्वज कहीं शोभा की वस्तु तो नहीं बन रही, यह प्रश्न मन में आता है। राष्ट्रध्वज यह राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है। इसका आदर करना हर भारतीय का कर्तव्य है। त्याग, क्रांति, शांति व समृद्धि इन मूल्यों की सीख हमें राष्ट्रध्वज देता है। भावना में बह कर राष्ट्रध्वज के रंगों का गलत उपयोग कर इन मूल्यों को हम कुचल रहे हैं। राष्ट्रध्वज का योग्य स्थान केवल ध्वज स्तंभ पर ही है। वही ध्वज का उचित सम्मान है। सामाजिक संकेत स्थल पर देशप्रेम का दिखावा करने से अच्छा है कि जिन क्रांतिकारियों ने देश के लिए प्राणों का भी बलिदान देकर स्वतंत्र भारत का झंडा फेहराते रखा उनके आदर्शों को आचरण में लाने हेतु प्रयास करें।
मनीषा चंदराणा, मुंबई

किसानों की दुर्दशा: आज किसान केवल राजनीति के भंवर में फंसते जा रहे हैं। राजनेता इनकी जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। वे केवल वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं, नेताओं को किसान याद आ जाते हैं। आजादी के सात दशक बाद भी किसान कर्ज में दबा है। चिलचिलाती धूप हो या कड़कड़ाती सर्दी, आंधी हो तूफान, वह लगातार मेहनत करता है, फिर भी परिवार को दो जून की रोटी नसीब नहीं करवा पाता। आज देश के किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। सरकार छोटी-छोटी कर्ज माफी जैसी घोषणाएं करके उन्हें बहला रही है। सरकार को किसानों की बुनियादी समस्याओं जैसे-फसलों का उचित मूल्य, बीमा, बिजली, पानी, सबसिडी, भंडारण आदि पर ध्यान देकर उन्हें दूर करना होगा, तभी किसानों की हालत सुधरेगी।
श्रीनिवास पंवार बिश्नोई, नोखा

भ्रष्टाचार की महामारी: भ्रष्टाचार एक बीमारी की तरह है। भारत में भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा है। रोजाना ही भ्रष्टाचार की खबरें सुनने को मिलती है। ब्लैकमेल, कर चोरी, पैसे लेकर वोट देना, तो कहीं वोट के लिए पैसा देना, गरीबों पर अत्याचार करना आदि सब भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। आज भारत की स्थिति यह है कि व्यक्ति रिश्वत के मामले में पकड़ा जाता है और रिश्वत देकर ही छूट जाता है। भ्रष्टाचार करने वाले अपने स्वार्थ मे अंधे होकर राष्ट्र का नाम बदनाम कर रहे हैं। समाज में विभिन्न स्तरों पर फैले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लोगों को स्वयं में ईमानदारी विकसित करनी होगी। साथ ही सरकार को भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। तभी हमारा देश इस महामारी से मुक्ति पा सकेगा।
अस्मिता, आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

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