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चौपाल: तनाव की परीक्षा

अभिभावकों को समझना चाहिए कि सभी बच्चे एक समान नहीं होते। उनका बौद्धिक स्तर एक जैसा नहीं होता, न सभी की पढ़ाई में रुचि एक समान होती है। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों पर दबाव न डाल कर उनके परीक्षा संबंधी तनाव को दूर कर लगातार उनका हौसला बढ़ाना चाहिए।

Author Published on: February 1, 2019 7:33 AM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं करीब आने के साथ ही ज्यादातर बच्चे तनावग्रस्त होने लगते हैं। कुछ बच्चे पास होने, कुछ माता-पिता व अध्यापकों की उम्मीदों अपनी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए, कुछ डर से और कुछ आत्मविश्वास की कमी के कारण तनाव में घिर जाते हैं। उनके इस तनाव को कम करने की कुंजी केवल माता-पिता के हाथों में होती है। लेकिन वे भी अपने बच्चों की दूसरे बच्चों से तुलना करके उन पर अन्य बच्चों जितने या उनसे अधिक नंबर लाने के लिए दबाव बनाने लगते हैं। इससे बच्चे अनचाहे तनाव में आ जाते हैं। अभिभावकों को समझना चाहिए कि सभी बच्चे एक समान नहीं होते। उनका बौद्धिक स्तर एक जैसा नहीं होता, न सभी की पढ़ाई में रुचि एक समान होती है। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों पर दबाव न डाल कर उनके परीक्षा संबंधी तनाव को दूर कर लगातार उनका हौसला बढ़ाना चाहिए।
अश्मिता, आंबेडकर कॉलेज, नई दिल्ली

महज वोट बैंक: हम भारत के लोग क्या अपनी शख्सियत को ‘वोट बैंक ऑफ इंडिया’ की तिजोरी में कैद कर चुके हैं? हम चुनिंदा लोगों के हाथ में देश की बागडोर सौंप कर सपनों की दुनिया बसा लेते हैं। बेशक सेवा करने की तमन्ना लिए हमारे नुमाइंदे हमारी जिम्मेवारियां बताते नहीं थकते लेकिन हकीकत का अहसास तब होता है जब फिर से चुनाव का ऐलान हो जाता है। अफसोस है कि ईमानदारी का पाठ पढ़ाते नेताओं की नजर में हम वोट बैंक से ज्यादा कुछ नहीं होते। जाति-धर्म, अगड़े-पिछड़े, और न जाने कितने तरह के वोट बैंकों में हमें बांट दिया जाता है। बेवजह इतिहास बदलने की जिद ने कुछ को सवर्ण तो कुछ को दलित बना दिया है। लॉलीपॉप की मिठास और आरक्षण के झुनझुने देकर हमारी हैसियत का मोल लगाना लोकतंत्र का मजाक ही तो है!
एमके मिश्रा, रातू, रांची, झारखंड

स्वाइन फ्लू: देश में हर साल स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ता जा रहा है और इससे होने वाली मौतों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। राजस्थान में तो इसे महामारी तक घोषित किया जा चुका है। स्वाइन फ्लू दरअसल ‘एचवनएनवन’ नामक वायरस से होता है। यह वायरस सर्दियों में ज्यादा सक्रिय होता है क्योंकि निम्न तापमान इसके लिए अनुकूल होता है। भारत में इस बीमारी के पिछले साल लगभग 15000 मामले सामने आए और 1100 से अधिक मौतें हुई थीं। यह वायरस एक व्यक्तिसे दूसरे में फैलता है लिहाजा इससे बचने के लिए लोगों को संक्रमित व्यक्ति से हाथ नहीं मिलाना चाहिए, खांसते और छींकते समय मुंह पर रूमाल रखना चाहिए, भीड़भाड़ वाली जगहों से बचना चाहिए, बार-बार साबुन से हाथ धोना चाहिए, सार्वजनिक स्थानों पर थूकना नहीं चाहिए और किसी भी तरह की दिक्कत या असहजता महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इन सबके अतिरिक्त सरकार को इस बीमारी की रोकथाम के लिए डॉक्टरों द्वारा निर्देशित कुछ खास और ठोस कदम उठाने चाहिए।
निखिल कुमार झा, दिल्ली विश्वविद्यालय

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