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चौपाल: गण और भ्रष्ट तंत्र

महात्मा गांधी ने गणतंत्र के लिए जो यह विचार रखा था कि ‘मैं ऐसे संविधान के लिए प्रयत्न करूंगा जिसमें छोटे से छोटे व्यक्ति को भी यह अहसास हो यह देश उसका है, इसके निर्माण में उनका योगदान है, उसकी आवाज का यहां महत्त्व है...।’ इसका अनुसरण करना आजाद देश के सत्ताधारी...

Author January 26, 2019 3:51 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

कवि मैथिलीशरण गुप्त ने लिखा है कि, ‘जो भरा नहीं भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं, वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं…।’ प्रणाम है उन महान शहीद देशभक्तों को जिनकी बदौलत आज हम सभी एक गणतंत्र देश में आजादी से रह रहे हैं। अपनी जान की परवाह किए बगैर इन सभी ने देश पर अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया था। महात्मा गांधी ने गणतंत्र के लिए जो यह विचार रखा था कि ‘मैं ऐसे संविधान के लिए प्रयत्न करूंगा जिसमें छोटे से छोटे व्यक्ति को भी यह अहसास हो यह देश उसका है, इसके निर्माण में उनका योगदान है, उसकी आवाज का यहां महत्त्व है…।’ इसका अनुसरण करना आजाद देश के सत्ताधारी, स्वार्थी राजनेता और नौकरशाही के लालची लोग भूल गए हैं, तभी तो आज गण और तंत्र के बीच फासला बढ़ता जा रहा है या फिर महात्मा गांधी के सपनों के संविधान को आज कोई पूरा करने वाला नही हैं? आज सबको कुर्सी और धन-दौलत की भूख है। आज गण के भ्रष्टतंत्र में आमजन को जरा भी अहसास नहीं होता है कि यह उनका तंत्र है या उनकी सेवा के लिए संविधान में गण के लिए तंत्र का प्रावधान किया गया था।

गण पर तंत्र का हावी होना यह भी दर्शाता है कि देश की राजनीति और नौकरशाही में स्वार्थी-लालची लोगों की बढ़ोतरी हो रही है और देशभक्तों की कमी। भारत के गण के तंत्र में आए खोट का आधार है राजनीति की खोट। सरकारें और नौकरशाही मिलकर तंत्र को खोटमय बनाने का काम करते हैं। गण के तंत्र में आए खोट को दूर करने के लिए गण भी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। तंत्र के आधार के खोट को चुनाव में अपने वोट का प्रयोग राजनीतिक तौर पर जागरूक होकर करके दूर करने का प्रयत्न करके भी किया जा सकता है।

लेकिन यहां यह कहना भी उचित होगा कि जब तक राजनेता और नौकरशाही अपने अंदर देशसेवा और लोकसेवा नहीं लाएंगे और देश को आजाद करवाने वाले महान देशभक्तों की कुर्बानियों के इतिहास को नहीं समझेंगे, शायद तब तक गण पर तंत्र हावी ही होता जाएगा। गणतंत्र की आन-बान और शान के लिए देश के हरेक नागरिक, चाहे वो किसी भी धर्म, संप्रदाय का क्यों न हो अपने अंदर देशभक्ति की भावना भरनी चाहिए। संविधान में मिले अधिकारों के प्रति ही नहीं, बल्कि कर्तव्यों के प्रति भी गंभीरता दिखानी चाहिए। और कोई भी ऐसा काम नहीं करना जो देशहित में न हो।
राजेश कुमार चौहान, जलंधर

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