ताज़ा खबर
 

चौपाल: आतंक का दंश

जब बात भारत की अखंडता, अस्मिता, सांप्रदायिक सौहार्द पर मंडराते खतरे की हो तब भी नेताओं की जुबानें जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही हैं। आतंकी हमले जैसे संवेदनशील मसले पर भी राजनीतिक दल अपना फायदा देखने की कोशिश कर रहे हैं।

Author Published on: February 16, 2019 5:52 AM
Pulwama Terror Attack, Kashmir Attack, Pulwama, JK, CRPF, Dantewada Attack, Naxals, JK News, State News, National News, India News, Hindi News, Pulwama Terror Attack, Jammu and Kashmir, Terrorist, Explosive, CRPF Bus, Uri Attack, Jammu and Kashmir, State News, Narendra Modi, Rajnath Singh, BJP, Ajit Dobhal, NSA, Srinagar, India News, Hindi News, पुलवामा आतंकी हमला, उड़ी आतंकी हमला, उरी हमला, जम्मू और कश्मीर, राज्य समाचार, हिंदी समाचारपुलवामा जिले के अवंतीपुरा में गुरुवार को सीआरपीएफ की बस पर किए गए हमले के बाद का दृश्य। (फोटोः पीटीआई)

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में गुरुवार को सीआरपीएफ के काफिले पर हमले में जवानों के मारे जाने पर राजनीति करना बेहद अफसोसनाक है। कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि उड़ी, पठानकोट, पुलवामा आतंकी हमलों की शृंखला और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता जारी है मगर केंद्र सरकार चुप है। उधर विदेश राज्यमंत्री और पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने कहा कि सेना के जवानों के खून की एक-एक बूंद का बदला लिया जाएगा। कांग्रेस प्रवक्ता ने गिनाया कि राजग सरकार के पांच साल में यह सत्रहवां बड़ा हमला है। उसके मुताबिक आतंकी हमारी सेना के जवानों के सिर काटकर ले जाते हैं और प्रधानमंत्री चुप रहते हैं!
इसे भारतीय राजनीति में संजीदगी के अवसान का दौर कहें या फिर राजनीतिक अपरिपक्वता का नायाब नमूना कि पुलवामा के जघन्य आतंकी हमले को भी सियासी नफा-नुकसान के तराजू में तोला जा रहा है।

जब बात भारत की अखंडता, अस्मिता, सांप्रदायिक सौहार्द पर मंडराते खतरे की हो तब भी नेताओं की जुबानें जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही हैं। आतंकी हमले जैसे संवेदनशील मसले पर भी राजनीतिक दल अपना फायदा देखने की कोशिश कर रहे हैं। इनदलों को समझना होगा कि आतंकवाद का कोई मजहब व चेहरा नहीं होता है, उसे बस आतंक फैलाने और खून बहाने से मतलब होता है। ऐसे हमले के बाद एक ओर जहां देश में गुस्से और गम का माहौल है वहीं दूसरी और सियासी दल इस पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने को तैयार हैं। अपने ही मुल्क के नेताओं को आतंकी हमले में अगर राजनीति की गुंजाइश और साजिश दिखाई देने लगे तो फिर संजीदगी की उम्मीद किससे की जाए!

दरअसल, सियासत का नया स्टाइल पहले सीबीआइ की कार्रवाई में सियासी साजिश देखता था तो अब आतंकी हमलों में भी देखने लगा है! जब देश बाह्य और आंतरिक खतरों से एक साथ कई मोर्चों पर जूझ रहा हो तो उस वक्त नेताओं के ऐसे बयान उनकी सोच पर सवाल खड़े करते हैं। ऐसे वक्त में आपसी मतभेद भुलाकर साथ खड़े रहने की जरूरत होती है। यही सोच एक स्वस्थ लोकतंत्र की भी पहचान है लेकिन दुर्भाग्यवश नेता अपने सियासी हित के चलते ऐसे बयान देने लगते हैं जो सीमा पार बैठे दुश्मनों के लिए खुराक का काम करते हैं।
अमन सिंह, प्रेमनगर, बरेली, उत्तर प्रदेश

किसी भी मुद्दे या लेख पर अपनी राय हमें भेजें। हमारा पता है : ए-8, सेक्टर-7, नोएडा 201301, जिला : गौतमबुद्धनगर, उत्तर प्रदेश
आप चाहें तो अपनी बात ईमेल के जरिए भी हम तक पहुंचा सकते हैं। आइडी है : chaupal.jansatta@expressindia.com

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 चौपाल: समय की मांग
2 चौपाल: प्रियंका से उम्मीदें
3 चौपाल: कैसी पारदर्शिता!