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चौपाल : कथनी बनाम करनी

रोजगार की तरह ही ‘सबको मिले अपना आवास’ का सपना दिखाते हुए मोदी सरकार ने प्रतिवर्ष गरीबों को तीन लाख मकान बना कर देने का वादा किया था, पर अभी तक दिए हैं सिर्फ 1623 मकान।
Author नई दिल्ली | July 18, 2016 00:11 am
केन्या का राजधानी नैरोबी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।(PTI Photo by Kamal Singh)

चुनाव के समय देश के युवाओं से जहां नरेंद्र मोदी ने प्रति वर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया था वहीं वसुंधरा राजे सरकार ने राज्य के युवाओं को प्रतिवर्ष पंद्रह लाख रोजगार देने की बात कही थी। पिछले बजट सत्र के दौरान राजस्थान विधानसभा में सवाल पूछने पर जहां राज्य सरकार रोजगार संबंधी कोई आंकड़ा नहीं दे सकी वहीं केंद्र सरकार ने एक करोड़ पैंतीस लाख रोजगार देने की बात स्वीकार की, जबकि दो साल में चार करोड़ लोगों को रोजगार देने का उसका वादा था। आज देश में पचास करोड़ युवा हैं और प्रति वर्ष रोजगार योग्य 1.3 करोड़ युवा इसमें जुड़ रहे हैं।

रोजगार की तरह ही ‘सबको मिले अपना आवास’ का सपना दिखाते हुए मोदी सरकार ने प्रतिवर्ष गरीबों को तीन लाख मकान बना कर देने का वादा किया था, पर अभी तक दिए हैं सिर्फ 1623 मकान। जबकि दो वर्ष में मिलने थे साठ लाख मकान। राजस्थान में मुख्यमंत्री जन आवास योजना मुंगेरीलाल के हसीन सपने बन कर रह गई है।

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में पूर्ववर्ती सरकार के काल से जारी मुफ्त इलाज अब कठिन हो गया है। वहां दवाइयों और जांच की उपलब्धता न होने के चलते प्राइवेट अस्पतालों द्वारा आमजन की जेबें ढीली की जा रही हैं। मोदी सरकार ने भी पिछले वर्ष चिकित्सा बजट में 55,163 करोड़ रुपए की कटौती की है। जहां शिशु पोषण और स्वास्थ्य रक्षा के लिए योजना में नौ फीसद, मिड डे मील योजना में ग्यारह फीसद, सबला योजना में चौबीस फीसद, ग्रामीण पेयजल योजना में अड़तालीस फीसद की बजटीय कटौती की है वहीं दलित, आदिवासी, महिलाओं आदि से संबंधित योजनाओं में करीब-करीब आधी बजटीय कटौती की है।

कालाधन और भ्रष्टाचार भी महंगाई की तरह अंकुशहीन है। पिछली सरकार जनांदोलन के दबाव में लोकपाल कानून बना गई थी। पर इस सरकार ने आज तक उसकी नियुक्ति नहीं की है। यह कम आश्चर्य का विषय नहीं है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री काल में भी टेलीकॉम घोटाले का आरोप सामने आया है, लेकिन उसकी उतनी चर्चा नहीं हो रही जितनी मनमोहन सिंह के समय के घोटालों की होती थी। मनमोहन के शासनकाल में घोटाले सामने आने पर संबंधित विभाग के मंत्रियों के इस्तीफे भी हुए, अब कोई चंू तक नहीं कर रहा। आखिर कोर्ट को ही कुछ करना होगा। जैसा कि उतरांखड के राष्ट्रपति शासन के बाद अरुणाचल को लेकर संवैधानिक दायित्व निभाने में सुप्रीम कोर्ट आगे आया है। उम्मीद है, भ्रष्टाचार पर भी मोदी की आंख खोलने का वह काम करेगा।

रामचंद्र शर्मा, तरुछाया नगर, जयपुर

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