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सम्मान का सवाल

संपादकीय ‘अपनों का सम्मान’ (24 जनवरी) में यह कहना सही है कि ‘पद्म सम्मान राष्ट्रीय गौरव की पहचान चिह्नित करते हैं’। लेकिन सच कहें तो सरकारों ने तटस्थ होकर पद्म सम्मानों के लिए नामों का चयन नहीं किया और योग्य व्यक्तियों के बदले अपने चहेतों को इनसे अलंकृत किया। राष्ट्र के लिए योगदान करने वालों […]

संपादकीय ‘अपनों का सम्मान’ (24 जनवरी) में यह कहना सही है कि ‘पद्म सम्मान राष्ट्रीय गौरव की पहचान चिह्नित करते हैं’। लेकिन सच कहें तो सरकारों ने तटस्थ होकर पद्म सम्मानों के लिए नामों का चयन नहीं किया और योग्य व्यक्तियों के बदले अपने चहेतों को इनसे अलंकृत किया। राष्ट्र के लिए योगदान करने वालों को कम और सरकार और सत्तारूढ़ दल या उसकी विचारधारा से मैत्री भाव रखने वालों को ज्यादा चुना। मुझे याद है कि वाजपेयीजी जब प्रधानमंत्री थे तो अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के एक चिकित्सक डॉ राणावत ने मुंबई आकर उनके घुटने का आॅपरेशन किया था और कुछ महीने बाद उन्हें पद््म भूषण देने की घोषणा हुई थी। तब भी जनसत्ता ने इसकी आलोचना करते हुए एक संपादकीय लिखा था और सरकार के कदम को सामंती सोच से प्रेरित बताया था। भारत सरकार में इंदिरा गांधी के समय कैबिनेट सचिव रहे बीडी पांडे को सन 2000 में पद्म विभूषण सम्मान दिया गया। मैंने आकाशवाणी के लिए विशेष साक्षात्कार में उनसे पूछा भी कि यह सम्मान रिटायरमेंट के तेईस साल बाद क्यों दिया गया?

यदि सरकार में बैठे उच्च पदस्थ लोग राष्ट्र और सरकार या राष्ट्र और राजनीतिक दल के बीच अंतर नहीं समझ सकते तो यह बुरी बात है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान पद््म अलंकरणों का ही हुआ है जो अपना गौरव पहले ही खो चुके हैं। दो साल पहले देहरादून के एक प्रतिष्ठित वैद्य मुझे अल्मोड़ा में मिले थे। उन्होंने बताया कि उन्हें राजीव गांधी के समय में पद्मश्री सम्मान मिला था, लेकिन ‘मैं इसे कभी अपने नाम के साथ नहीं लगाता’। सच्चाई तो यह है कि गांधी, सुभाष या नेहरू जैसे हमारे राष्ट्रीय नेता हों, अमिताभ जैसे सिने कलाकार हों, सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी हों या लोगों के दिलों में बसे महान कलाकार-साहित्यकार हों- इन्हें पद्म सम्मान मिलने या न मिलने से इनकी प्रतिष्ठा में क्या अंतर आएगा? कैलास सत्यार्थी को सरकार ने पद्मश्री के लायक नहीं समझा था तो क्या हुआ? उन्हें नोबेल पुरस्कार मिल ही गया। यह भी विडंबना ही है कि अनेक मामलों में पहले हमारे देश की प्रतिभाओं को देश के बाहर बड़ा पुरस्कार मिला है और तब उनकी सुध सरकार ने ली और उसे पद््म सम्मान के लायक समझा गया।

कमल जोशी, अल्मोड़ा

 

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