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कांटे से कांटा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा करने का बयान देकर भजपा को सकते में डाल दिया है। भाजपा ने भी बिना देर किए स्पष्ट कर दिया.

Author September 24, 2015 2:01 AM

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा करने का बयान देकर भजपा को सकते में डाल दिया है। भाजपा ने भी बिना देर किए स्पष्ट कर दिया कि भाजपा आरक्षण को उचित समझती है और समीक्षा की कोई जरूरत नहीं है। उधर आरक्षण के समर्थक नेताओं का कहना है कि भले ही भाजपा ने खंडन कर दिया हो मगर उसका असली चेहरा सामने आ गया है। लालू ने तो चुनौती दे डाली कि केंद्र में दम है तो आरक्षण खत्म करके दिखाए। लालू ने एक कदम और आगे बढ़ कर फरमाया कि अब संख्या के आधार पर आरक्षण तय करने की मांग होगी। मोहन भागवत और मोदी सरकार आरक्षण पर समीक्षा तो चाहते हैं मगर पहले इसके लिए माहौल तैयार करने की मंशा है। अभी बिहार में विधानसभा चुनाव होना है जहां जात-पात और आरक्षण समर्थकों का बोलबाला है। इसीलिए मंत्री रवि शंकर, जो बिहार के हैं, से एकदम कहलवा दिया कि सरकार मौजूदा आरक्षण को सही मानती है।

दरअसल, इसमें कोई शक नहीं कि अगर चुनाव की मजबूरी न होती तो सरकार इस मुद्दे पर सोच-विचार करने की बात कह कर आरक्षण विरोध को हवा देती। ऐसा लगता है कि भाजपा आरक्षण की समीक्षा चाहती तो है लेकिन वह अपने पाले के ओबीसी और अनुसूचित जाति/ जनजाति के नेताओं के मुंह से ही आरक्षण की समीक्षा कराने की बात कहलवा कर माहौल बनाने की शुरुआत करेगी। यह भी हो सकता है कि भाजपा अनुसूचित जाति/ जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग के अपने किसी नेता को आगे कर उसी से जाति के आधार पर आरक्षण खत्म करने का आंदोलन चलवा कर वातावरण बनाने का प्रयास करे।

मोहन भागवत ने यों ही यह बयान नहीं दिया है। इसके पीछे चिंतन यही है कि जाति के आधार पर आरक्षण बंद कर उसे आर्थिक आधार पर कर दिया जाए। आर्थिक आधार पर आरक्षण का तर्क ऊपरी सतह पर ठीक लगता है। वैसे अगर अतीत में हमारी हिंदू सभ्यता ने जाति के आधार पर भेदभाव न किया होता और ऊंच-नीच की विकृति सत्ता के डंडे से लागू न की होती तो आज जाति के आधार पर आरक्षण की आवाज न उठती। जिस आधार पर सैकड़ों वर्षों तक समाज की कई जातियों को दबाया गया, उन्हें पढ़ने-लिखने से वंचित रखा, तरह-तरह के अमानवीय कृत्य उनसे कराए गए, आध्यात्मिक रूप से उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया तो अब जाति के आधार पर ही आरक्षण देकर कांटे से कांटे को निकाला जा रहा है। वैसे लगता है, भाजपा के मंसूबे धरे के धरे ही रह जाएंगे क्योंकि अब पिछड़ों के नेता तैयार हो गए हैं। भाजपा अब ज्यादा चालाकी नहीं दिखा सकेगी।
पीसी विश्वकर्मा, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

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