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नैतिकता का प्रश्न

अगर आपको पैसे जमा कराने के लिए बैंक जाना है और पचास हजार या उससे ज्यादा की रकम नकद में जमा करानी है तो आपको अपना पैन नंबर नकद जमा कराने वाली पर्ची में भरना होगा। इसके जरिए सरकार आपके लेनदेन पर नजर रखती है। कोई लेनदेन उसे संदिग्ध महसूस होता है तो तत्काल संबंधित व्यक्ति से पूछताछ हो जाती है। लेकिन जब राजनीतिक दलों से उनके लेनदेन के बारे में ब्यौरा मांगा जाता है तो उनकी त्योरियां चढ़ जाती हैं। पक्ष-विपक्ष, सभी एक सुर में इसका विरोध करने लगते हैं। जिससे राजनीतिक दलों को लेकर मन में एक संदेह पैदा होता है।

नैतिकता की दुहाई देने वाले सभी नेता मानो इस मामले में अपनी तमाम नैतिक दलीलों को खूंटी पर टांग देते हैं। आरटीआइ के तहत इनको लाना भी इन्हें मंजूर नहीं है। इससे अच्छा हो कि सभी पार्टियां यह मान लें कि उनकी गाड़ी भी कहीं न कहीं काले धन के र्इंधन से चलती है! अब चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस कम से कम लोगों को झूठी नैतिकता के ढकोसलों से तो मुक्ति मिले। जो आए दिन संसद में जनता के हितैषी होने का दावा कर जनता की गाढ़ी कमाई से चलने वाली संसद को ठप्प तक करा देती हैं।
आलोक कुमार, गाजियाबाद

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