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महंगी दोस्ती

गले लगना और गले पड़ना दोनों अलग-अलग बात हैं! परमाणु संधि के संबंध में अमेरिका से समझौता हुआ है जिसके मुताबिक यदि अमेरिकी कंपनियों से दुर्घटना होती है तो भारत की चार बीमा कंपनियां 750 करोड़ और बाकी के 750 करोड़ रुपए भारत सरकार देगी। यहां 1500 करोड़ की सीमा तय की गई है। यदि […]

गले लगना और गले पड़ना दोनों अलग-अलग बात हैं! परमाणु संधि के संबंध में अमेरिका से समझौता हुआ है जिसके मुताबिक यदि अमेरिकी कंपनियों से दुर्घटना होती है तो भारत की चार बीमा कंपनियां 750 करोड़ और बाकी के 750 करोड़ रुपए भारत सरकार देगी। यहां 1500 करोड़ की सीमा तय की गई है। यदि नुकसान ज्यादा हुआ तो सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुक्त कैसे हो सकती है? इसे किस लिहाज से उचित ठहराया जा सकता है?

दूसरा अहम सवाल है कि अमेरिकी कंपनियों से हुए नुकसान की भरपाई भारत क्यों करे? इसी मामले पिछली सरकार ने समझौते नहीं किया था। मोदी सरकार को अमेरिका से दोस्ती और ओबामा को खुश करने की इतनी जल्दी और खासकर भारत की कीमत पर क्यों?

निर्मल राजपूत, चंडीगढ़

 

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