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इस हम्माम में

लंदन में बैठ कर ललित मोदी उनसे उपकृत होने वाले व्यक्तियों और भारत के राजनेताओं के नाम बता कर कोई नया राज जाहिर नहीं कर रहे हैं। ललित मोदी से लाभ लेने वाले राजनेता दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों मे हैं। उन्होंने हर उस शख्श को उपकृत किया जो उनके काम आ सकता था। मोदी लंदन […]
Author July 1, 2015 17:34 pm

लंदन में बैठ कर ललित मोदी उनसे उपकृत होने वाले व्यक्तियों और भारत के राजनेताओं के नाम बता कर कोई नया राज जाहिर नहीं कर रहे हैं। ललित मोदी से लाभ लेने वाले राजनेता दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों मे हैं। उन्होंने हर उस शख्श को उपकृत किया जो उनके काम आ सकता था। मोदी लंदन में रह कर भी राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष का पिछला चुनाव जीत गए थे और यह जीत बिना राज्य सरकार की मदद के संभव ही नहीं थी। वह तो न्यायालय ने ललित मोदी के अध्यक्ष चुने जाने को अवैध बताया अन्यथा वे लंदन में बैठ कर राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चला रहे होते।

केवल विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पति या पुत्री ललित मोदी की लीगल टीम में नहीं हैं बल्कि ललित ने कई राजनेताओं-अधिकारियों के पुत्र-पुत्रियों को आइपीएल में नौकरियां दीं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार भी शामिल हैं। ललित मोदी आइपीएल में इतने ताकतवर थे कि एक बार केंद्र्र सरकार ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जब आइपीएल की तिथियों में परिवर्तन करने को कहा तो मोदी ने उन्हीं तारीखों में आइपीएल दक्षिण अफ्रीका में करा दिया।

इसलिए ललित मोदी के क्रिकेट घोटाले जब सामने आए तो किसी की हिम्मत नहीं थी की उन्हें गिरफ्तार करे। उलटे उन्हें भागने में तमाम राजनेताओं और अधिकारियों ने मदद की और आज भी आइपीएल से जुड़े कई अहम दस्तावेज ललित मोदी को लंदन में भी उपलब्ध हैं। ऐसे में राजस्थान की मुख्यमंत्री यदि पूर्व में दो बार ललित मोदी की पत्नी को इलाज के लिए पुर्तगाल ले गर्इं तो यह या तो उनके पारिवारिक रिश्तों की वजह से है या कारोबारी रिश्तों के कारण। फिर जिस तरह एक रियल एस्टेट कंपनी ने राबर्ट वाड्रा को पैंतीस करोड़ रुपए बिना ब्याज का कर्ज देकर उन्हें खुद की जमीन बेच दी और एक महीने में राबर्ट ने भू-उपयोग बदलवा कर जमीन के भाव बढ़ा कर फिर से 300 करोड़ में उसी रियल एस्टेट को बेच कर अपनी एक लाख की कंपनी को 300 करोड़ की कंपनी बना दिया वैसे ही वसुंधरा के बेटे दुष्यंत की मदद ललित मोदी ने की और उन्हें भाजपा का राबर्ट बना दिया।

इससे साबित होता है कि राजनीति में दूध के धुले अब अंगुलियों पर गिनने लायक ही बचे होंगे। आज जिन अडानी-अंबानी को प्रधानसेवकजी अपने साथ विदेश यात्राओं में लिए घूमते हैं कल उन पर अंगुली उठे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि आखिर क्यों एक जनसेवक इन्हें इतना मान सम्मान देता रहा है! इसलिए ललित मोदी हों या कारपोरेट घराने, ये राजनेताओं को मदद ही इसीलिए करते हैं कि समय आने पर उपकृत राजनेता भी बदला चुकाएं।

इसीलिए वित्तमंत्री बजट में कॉरपोरेट जगत को करों में छूट देते हैं और आम जनता को लूटते हैं। असल में ललित मोदी भारतीय क्रिकेट की वो हस्ती हैं जिसका उनसे जुड़े लोगों ने खूब लाभ उठाया और जब वह बेनकाब हो गई तो अब सबको बेपरदा करने पर उतर आई है। इसलिए केवल ललित मोदी के नाम पर या उनके रोज के नए खुलासों पर ज्यादा हल्ला मचाने की बजाय उसे फिर से देश लाकर कानून के हवाले कैसे किया जाए इस पर बात होनी चाहिए।
हरीशकुमार सिंह, उज्जैन

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