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किसका विकास

मोदी सरकार के ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे की हवा निकलती दिखाई दे रही है। कृषिप्रधान देश होते हुए भी हमारी सरकार किसानों के बारे में नहीं सोच रही है। भारत की अधिकतर जनता कृषि पर ही निर्भर है। हरियाणा और पंजाब में किसानों को जरूरत के अनुसार यूरिया नहीं मिल रहा है। गेहंू की […]

मोदी सरकार के ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे की हवा निकलती दिखाई दे रही है। कृषिप्रधान देश होते हुए भी हमारी सरकार किसानों के बारे में नहीं सोच रही है। भारत की अधिकतर जनता कृषि पर ही निर्भर है। हरियाणा और पंजाब में किसानों को जरूरत के अनुसार यूरिया नहीं मिल रहा है। गेहंू की पैदावार सबसे अधिक इन्हीं दो राज्यों में होती है। यूरिया न मिलने के कारण किसान यहां काफी परेशान नजर आ रहे हैं। नवंबर से जनवरी तक यही समय होता है जब किसान अपने फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए खेतों में यूरिया का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन मोदी सरकार किसानों तक यूरिया पहुंचने में विफल रही है। वह हालांकि कह रही है कि इस बार पिछली सरकार के समय से भी ज्यादा यूरिया दुकानों में आया है। तो फिर वह कहां गया?

किसान सुबह से ही यूरिया लेने के लिए लाइन में लग जाते हैं और भूखे-प्यासे शाम तक खड़े रहते हैं पर कोई जवाब नहीं मिलता। अगर किसान इसका विरोध करते हैं तो उन पर लाठियां बरसा दी जाती हैं। मोदी सरकार विदेशी कंपनियों को तो भारत में निवेश करने के लिए कह रही है लेकिन इसे चाहिए कि पहले भारत में कृषि, छोटे कारखानों और हथकरघा की तरफ ध्यान दे। भारत में अधिक रोजगार इन्हीं की वजह से मिलता है। लेकिन सरकार इनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। वह सिर्फ हर जगह भाजपा की सरकार बनवाने में लगी हुई है। उसका विकास कार्यों की तरफ ध्यान ही नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान तो वह यूपीए सरकार को ड्रामा करने वाली और खुद को विकास करने वाली बताती है लेकिन विकास कहीं नजर नहीं आ रहा।

राहुल शर्मा, नोएडा

 

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