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न्याय का तकाजा

जब से भारत में सऊदी अरब के राजनयिक द्वारा अपने घर में काम करने वाली दो नेपाली महिलाओं को शारीरिक और यौनिक यातनाएं देने का मामला सामने आया है..

Author September 26, 2015 11:12 am

जब से भारत में सऊदी अरब के राजनयिक द्वारा अपने घर में काम करने वाली दो नेपाली महिलाओं को शारीरिक और यौनिक यातनाएं देने का मामला सामने आया है, तभी से सोच रहा हूं कि आगे क्या होता और क्या प्रतिक्रियाएं होतीं अगर पीड़ित महिलाएं अमेरिका या किसी अन्य ताकतवर देश की नागरिक होतीं! क्या तब भी भारत सरकार राजनयिक छूट का हवाला देते हुए अभियुक्त को अपने देश वापस जाने देती?

क्या अमेरिका या नेपाल का दूसरा पड़ोसी देश चीन वैसा धैर्य रखता जैसा नेपाल ने रखा या भारत पर अभियुक्तों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का तीव्र दबाव डाला जाता? ठीक-ठीक कह पाना तो मुश्किल है, लेकिन मैं समझता हूं कि वे देश अपने नागरिक को न्याय दिलाए बिना कतई नहीं मानते। हमारी दुनिया में व्यक्ति की तरह किसी राष्ट्र को मिलने वाली प्रतिष्ठा और न्याय के मामले में भी उसकी ताकत और हैसियत कितनी अहमियत रखती है, इस कटु सत्य से एक बार फिर साक्षात्कार हुआ है। बहुत दुखद!

भाजपा और मोदीजी अपनी छवि एक मजबूत और तुरंत निर्णय लेने वाले की प्रस्तुत करते आए हैं। लेकिन उपर्युक्तमामले में पुलिस के जांच शुरू करने और पीड़ित महिलाओं के बयान सामने आने के बाद भारत सरकार ने जिस तरह नरम रुख दिखाया और आरोपी राजनयिक को निष्कासित तक करने की हिम्मत न करके उसे स्वयं स्वदेश लौटने दिया गया वह उचित नहीं प्रतीत होता।

महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती यौन हिंसा के मामलों का प्रमुख कारण भी लंबी और पेचीदा कानूनी प्रक्रिया, ज्यादातर अपराधों में दोष साबित न होना और अपराधियों का बच निकलना है। समूची दुनिया को विचलित कर देने वाले दिसंबर 2012 के निर्भया कांड से सरकार और न्याय प्रणाली पर इतना असर नहीं पड़ा कि 2 साल और 9 माह हो जाने के बाद भी अपराधियों को दंड का अंतिम निर्णय आ सके! यदि सचमुच असर हुआ होता तो भारत सरकार इस मामले में भी न्याय के प्रति प्रतिबद्ध दिखती। अगर भारत सरकार को तेल का आयात या अन्य व्यापारिक हित उन पीड़ित नेपाली महिलाओं को, जो भीषण भूकंप की विभीषिका झेल रहे एक गरीब देश से मजबूरी में काम की तलाश में यहां आई होंगी, न्याय दिलाने से ज्यादा महत्त्वपूर्ण लगते हैं तो यह दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा।
कमल जोशी, अल्मोड़ा, उत्तराखंड

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