ताज़ा खबर
 

संसद में गतिरोध

लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच बहसबाजी, आरोप-प्रत्यारोप, दोषारोपण, टोका-टाकी या फिर यदा-कदा सदन से बहिर्गमन आदि की परंपरा हमारे यहां कोई नई नहीं है। मगर लगता है कि अब यह परंपरा एक सामान्य परिपाटी बन गई है। लगातार एक-डेढ़ सप्ताह तक संसद की कार्यवाही न चलने देने से देश के राजकोष पर कितना […]

Author August 5, 2015 1:55 AM

लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच बहसबाजी, आरोप-प्रत्यारोप, दोषारोपण, टोका-टाकी या फिर यदा-कदा सदन से बहिर्गमन आदि की परंपरा हमारे यहां कोई नई नहीं है। मगर लगता है कि अब यह परंपरा एक सामान्य परिपाटी बन गई है। लगातार एक-डेढ़ सप्ताह तक संसद की कार्यवाही न चलने देने से देश के राजकोष पर कितना भार पड़ता है, यह चिंता का विषय है। एक अनुमान के मुताबिक विपक्ष द्वारा संसद नहीं चलने देने के कारण अभी तक करोड़ों रुपयों का नुकसान हो चुका है।

दरअसल, विपक्ष ललितगेट और व्यापमं के मुद्दे पर मंत्रियों के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है और अपने पक्ष में उसने दलील दी है कि ‘जो तरीका उन्होंने यानी सत्तापक्ष ने तब अपनाया था, वही हमने अब अपनाया है।’ हालांकि विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी और हंगामे के बीच गृह मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि चूंकि मंत्रियों के खिलाफ कोई एफआइआर दर्ज नहीं है, अदालत की कोई टिप्पणी नहीं है और प्रथमदृष्टया कोई मामला नहीं है, ऐसे में उनके इस्तीफे की मांग का कोई औचित्य नहीं बनता।

उन्होंने यहां तक कहा कि ‘हम चर्चा से भाग नहीं रहे हैं और हम इसके लिए तैयार हैं।’ मगर विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा है जिसके कारण नाराज लोकसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के पच्चीस सांसदों को पांच दिन के लिए निलंबित कर दिया। इन सभी सांसदों पर संसद की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप था।

समय आ गया है जब संसद के चलने या न चलने देने को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों की सहमति से एक आचार-संहिता तैयार की जाए ताकि हमारे देश की गरीब जनता का पैसा इस तरह से बर्बाद न हो।
शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App