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प्रकृति के स्तंभ

महासागर एक ओर हमारी धरती पर जीवन का एक प्रतीक है तो दूसरी ओर यह पर्यावरण संतुलन में भी अपनी मुख्य भूमिका अदा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि धरती पर जीवन का प्रारंभ महासागरों से ही हुआ। अपने आरंभिक काल से ही महासागर जीवन के विविध रूपों और आयामों को वर्तमान तक संजोए […]

विकास के दौर में पर्यावरण के साथ इंसानी खिलवाड़ ने विनाश के रास्ते भी खोल दिए हैं।

महासागर एक ओर हमारी धरती पर जीवन का एक प्रतीक है तो दूसरी ओर यह पर्यावरण संतुलन में भी अपनी मुख्य भूमिका अदा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि धरती पर जीवन का प्रारंभ महासागरों से ही हुआ। अपने आरंभिक काल से ही महासागर जीवन के विविध रूपों और आयामों को वर्तमान तक संजोए हुए हैं। सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से महत्ता के कारण महासागर अत्यंत उपयोगी हैं। संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में निश्चित किए गए टिकाऊ विकास के लक्ष्यों में महासागर के संरक्षण एवं उनके नियमित उपयोग को भी शामिल किया गया है। धरती पर अगर जीवन का अस्तित्व है तो वह यहां उपस्थित वायुमंडल और महासागरों जैसे कुछ विशेष कारकों के कारण से ही संभव हो पाया है।

लेकिन जिस तरह हम दिन-प्रतिदिन अपने महासागरों को दूषित कर रहे हैं, वह चिंताजनक है। जबकि समुद्री जीवन को नुकसान पहुंचाने वाली तमाम गतिविधियों, जैसे अपतटीय तेल ड्रिलिंग और प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने की आवश्यकता है। अगर किसी कारण के चलते पृथ्वी का तापमान बढ़ता है तो महासागरों की कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने की क्षमता में कमी आएगी। इससे वायुमंडल में गैसों की आनुपातिक मात्रा में भी परिवर्तन होगा और तब जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियों में असंतुलन होने से पृथ्वी पर जीवन खतरे में पड़ सकता है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध संस्था अंतर-सरकारी पैनल की एक रिपोर्ट के अनुसार मानवीय गतिविधियों से ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्री जलस्तर में वृद्धि हो रही है और जिसके परिणामस्वरूप दुनिया भर के मौसम में बदलाव भी हो सकते हैं। महासागरों का एक अहम स्थान और योगदान होता है, इसलिए इनका संरक्षण करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
’अमन सिंह, बरेली, उप्र

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