ताज़ा खबर
 

मानक तबादला नीति

सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों-अधिकारियों के असामयिक और मनमाने तबादलों के समाचार अक्सर आते रहते हैं। शासन-प्रशासन के सुचारु संचालन के लिए विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों की तैनाती की जाती है।

Author February 4, 2019 3:50 AM
प्रतीकात्मक फोटो

सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों-अधिकारियों के असामयिक और मनमाने तबादलों के समाचार अक्सर आते रहते हैं। शासन-प्रशासन के सुचारु संचालन के लिए विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों की तैनाती की जाती है। तबादले के बाद नई जगह पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी को वहां की भौगोलिक व सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलना होता है लेकिन देखा गया है कि जैसे ही वह स्थानीय हालात को समझ कर पूरी गति से कार्य करना शुरू करता है, उसके लिए फिर नई जगह जाने का फरमान आ जाता है। नियमित विभागीय फेरबदल और तबादलों के अलावा भी बहुत से ऐसे कारण होते हैं जिनके चलते सरकारी कर्मचारी को एक स्थान पर ज्यादा समय बिताने का अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे कारणों में कर्मचारी की ईमानदार कार्यशैली, जो किसी स्थानीय नेता पसंद न आ रही हो, प्रमुख है। यह शासकीय सेवक के मनोबल को तोड़ने वाला होता है।

एक स्थान पर बिना पर्याप्त या निर्धारित समय व्यतीत किए अचानक तबादले से कर्मचारी के साथ-साथ उसका पूरा परिवार प्रभावित होता है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर अचानक स्थान परिवर्तन के कारण स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से भी जूझना पड़ता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए पूरे देश के लिए एक मानक तबादला नीति बनाए जाने की जरूरत है। बड़े राज्यों में प्रदेश स्तर हुए तबादले में भी एक भौगोलिक, सामाजिक व भाषाई विशिष्टता वाले क्षेत्र से शासकीय सेवक को दूसरे भौगोलिक, सामाजिक व भाषाई विशिष्टता वाले क्षेत्र में जाना होता है। यदि उसे नए क्षेत्र में कार्य करने लिए पर्याप्त समय दिया जाए तो वह स्थानीय समस्याओं को ज्यादा बेहतर तरीके से समझ कर उनका निदान कर सकेगा। तबादलों को राजनीतिक दबाव से सर्वथा दूर रखने की भी जरूरत है।
’ऋषभ देव पांडेय, सूरजपुर, छत्तीसगढ़

अंगदान से जीवनदान
आज हमारे देश में लाखों लोग केवल इसलिए अपना जीवन नहीं बचा पाते कि उन्हें समय पर अंगदान नहीं मिल पाता। समाज में फैले अंधविश्वास, रूढ़ियों और शिक्षा के अभाव में लोग अंगदान करने से कतराते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में केवल 0.01 प्रतिशत लोग अंगदान करते हैं जबकि पश्चिमी देशों में यह आंकड़ा 70 से 80 प्रतिशत है। अंगदान न करने के पीछे एक बड़ा कारण लोगों की यह आशंका भी है कि कहीं डॉक्टर दान किए गए अंग को किसी जरूरतमंद को न देकर कारोबार न खोल दें! लेकिन अब बढ़ती पारदर्शिता के कारण हम अंगदान की संपूर्ण जानकारी ले सकते हैं। आज अंगदान से हर साल पांच लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है। लिहाजा, जरूरत है केवल जागरूकता की ताकि लोग अंधविश्वासों को दूर कर अंगदान के लिए प्रेरित हों।
’श्रीनिवास पंवार बिश्नोई, नोखा, राजस्थान

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App