Jansatta Editorial Black Money - Jansatta
ताज़ा खबर
 

काले धन के खिलाफ

कुछ समय से काला धन एक संवेदनशील विषय बन गया है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान विदेशों में जमा काले धन की वापसी को एक बड़ा मुद्दा बनाया था। उनकी सरकार बनी तो उसके शुरुआती फैसलों में बाहर जमा काले धन का […]

Author May 6, 2015 9:05 AM

कुछ समय से काला धन एक संवेदनशील विषय बन गया है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के दौरान विदेशों में जमा काले धन की वापसी को एक बड़ा मुद्दा बनाया था। उनकी सरकार बनी तो उसके शुरुआती फैसलों में बाहर जमा काले धन का पता लगाने के लिए एसआइटी यानी विशेष जांच दल गठित करना भी था। अलबत्ता इसका श्रेय सर्वोच्च न्यायालय को जाता है, जिसने एसआइटी के गठन के लिए समय-सीमा तय की हुई थी।

काले धन की बाबत सवाल उठने पर मोदी सरकार का भी जवाब यूपीए सरकार जैसा ही होता था, वह यह कि अन्य देशों से किए गए कराधान संबंधी समझौते आड़े आ रहे हैं। फिर, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने यह तक कह दिया कि काले धन की वापसी का मुद््दा एक आकर्षक चुनावी जुमला भर था। इस टालमटोल भरे रुख से यह कहा जाने लगा कि सरकार अपने वादे को लेकर गंभीर नहीं है।

इस धारणा को तोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले दिनों कई सख्त प्रावधान किए हैं। सरकार का इरादा बेनामी सौदों से संबंधित कानून और काले धन को सफेद बनाने से रोकने वाले कानून में भी संशोधन करने का है।काला धन विरोधी विधेयक ने यह गुंजाइश छोड़ी है कि विदेशी गुप्त खाता रखने वाले अपनी वैसी रकम की घोषणा कर, उस पर कर और जुर्माना चुका कर अभियोजन से बच सकते हैं। पर विधेयक के मुताबिक ऐसा मौका सिर्फ एक बार मिलेगा और उसकी अवधि सीमित होगी। हर भारतीय नागरिक के लिए अनिवार्य होगा कि वह अपने विदेशी खाते या संपत्ति की सूचना संबंधित प्राधिकरण को दे। न देने पर उसे भारी जुर्माने के अलावा कैद की सजा भी हो सकती है।

छिपाई गई विदेशी आय या संपत्ति पर तीस फीसद की दर से कर देना होगा, जुर्माना इसका तीन गुना अधिक होगा। रिटर्न में विदेशी आय या संपत्ति छिपाने पर दस लाख रुपए का जुर्माना देना पड़ेगा। अगर कोई भारतीय नागरिक अपनी विदेशी आय या संपत्ति पर कर चुकाने से जान-बूझ कर बचने का दोषी पाया जाएगा, तो उसे तीन साल से दस साल के सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी। रिटर्न में उसे छिपाने पर छह महीने से सात साल की सजा का प्रावधान है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि यह कानून काफी सख्त है। पर इसी के साथ यह आशंका भी है कि कहीं कर-अधिकारी इन प्रावधानों का दुरुपयोग तो नहीं करेंगे। रिटर्न अपर्याप्त पाए जाने को दंडनीय बनाया गया है, पर वह अपर्याप्त है यह आखिरकार कोई अफसर ही तय करेगा। विदेश में जमा धन या संपत्ति को छिपाने में मददगार बैंक या वित्तीय संस्थान के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गई है। यह किस हद तक व्यावहारिक हो पाएगा? इस कानून का जोर काले धन पर अंकुश लगाने पर तो है, मगर काले धन के स्रोतों और प्रवाह को रोकने के एक बड़े तकाजे को नजरअंदाज कर दिया गया है। जमीन-जायदाद का कारोबार काले धन का एक बड़ा स्रोत भी है और ठिकाना भी।

इसी तरह पी-नोट के जरिए पहचान छिपा कर शेयर बाजार में पैसा लगाने की सुविधा ने भी काले धन का जाल बढ़ाया है। फिर, इसका एक जरिया ‘मॉरीशस रूट’ और फर्जी कंपनियां खड़ी करना भी है। अर्थव्यवस्था के ऐसे क्षेत्रों के नियमन और उन्हें पारदर्शी बनाए बिना काले धन से निपटने की कोई भी कवायद अधूरी रहेगी।
विनय रंजन, कमला नगर, दिल्ली

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App