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सत्ता के केंद्र

केजरीवाल जब सत्ता से दूर थे तो तंत्र को सुधारने की बात करते थे। वे कहते थे कि सत्ता का विकेंद्रीकरण होना चाहिए। पुलिस से लेकर सारे महकमों को स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि प्रधानमंत्री पर भी निगरानी रखी जा सके, वे भी किसी के प्रति जवाबदेह हों। सीबीआइ को स्वतंत्र करना […]

Author July 23, 2015 1:44 PM

केजरीवाल जब सत्ता से दूर थे तो तंत्र को सुधारने की बात करते थे। वे कहते थे कि सत्ता का विकेंद्रीकरण होना चाहिए। पुलिस से लेकर सारे महकमों को स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि प्रधानमंत्री पर भी निगरानी रखी जा सके, वे भी किसी के प्रति जवाबदेह हों। सीबीआइ को स्वतंत्र करना चाहिए। अब जबकि वे खुद सत्ता में हैं, ऐसा लग रहा है कि उनका नया जन्म हो गया है! अब वे नेता केजरीवाल हो गए हैं, और नेता बनने के बाद जैसा सब नेता सोचते हैं कि जनता मूर्ख है, वे भी सोचने लगे हैं। केजरीवाल अब चाहते हैं कि सत्ता की सारी कमान सिर्फ उनके हाथ में हो और जो बच जाए वे उनके मित्र-मंडली और रिश्तेदारों के पास हो।

इसका ताजा उदाहरण है दिल्ली महिला आयोग में उनके रिश्तेदार की नियुक्ति! स्वाति मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके पहले की अध्यक्षा बरखा सिंह ने जिस तरह से महिला आयोग को राजनीति का अखाड़ा बनाया था, अब डर है कि स्वाति मालीवाल भी इसे अखाड़ा न बना दें। क्या इसी तरह की राजनीति करने के लिए ‘आप’ को दिल्ली की जनता ने चुना था। कितना अच्छा होता कि वे महिला आयोग में किसी ऐसी महिला को बिठाते, जिसका राजनीति से दूर-दूर का नाता न होता और वह निस्वार्थ भाव से महिलाओं के लिए कार्य करती।
मोहन सूर्यवंशी, नई दिल्ली

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