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चौपालः प्रदूषण से मुक्त

सोचने वाली बात है कि हमने अपने शहरों का क्या हाल बना रखा है? समझने की जरूरत है कि प्रदूषण को बढ़ावा देने में हमारा ही सबसे बड़ा योगदान है, हम ही प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते रहे हैं।

यमुना का पानी साठ प्रतिशत तक साफ हो गया है।

जबसे पूर्णबंदी लागू हुई है, सारे शहर प्रदूषण मुक्त हो गए हैं। राजधानी दिल्ली में हर समय प्रदूषण की चादर बिछी रहती थी, वह अब एकदम साफ-सुथरी और प्रदूषण मुक्त हो रही है। यमुना को साफ करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने न जाने कितने रुपए खर्च कर दिए, पर इसमें कोई सफलता नहीं मिल सकी, लेकिन अब यमुना का पानी साठ प्रतिशत तक साफ हो गया है। कुछ दिनों की पाबंदी से ही प्रदूषण इतनी बड़ी मात्रा में कम हो गया है। सोचने वाली बात है कि हमने अपने शहरों का क्या हाल बना रखा है? समझने की जरूरत है कि प्रदूषण को बढ़ावा देने में हमारा ही सबसे बड़ा योगदान है, हम ही प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते रहे हैं, जिससे न जाने हर साल कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। क्या नहीं लगता कि हमें अपने आप में स्वच्छता के प्रति कुछ सुधार करने की जरूरत है। यह समाज, शहर, राज्य, देश हमारा है, तो क्या हम इनको साफ-सुथरा नहीं रख सकते?
’संजू तैनाण, चौबारा, हनुमानगढ़

कड़े दंड की जरूरत
इस वक्त डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों पर हमला करना न केवल उनके कर्तव्य पालन में बाधा डालना, बल्कि अमानवीयता की पराकाष्ठा है। ऐसा करने वाले देश, समाज और जनता के साथ-साथ स्वयं के शत्रु हैं। कुछ लोगों पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई, जो न्यायोचित है। ऐसे लोगों पर न केवल रासुका लगाई जाए, बल्कि उन्हें कड़ा दंड देना चाहिए ताकि अन्य लोगों के हौसले बुलंद न हों।
-हेमा हरि उपाध्याय, अक्षत खाचरोद, उज्जैन

प्रेरक पहल
देश में फैली महामारी कोरोना विषाणु की समस्या से निपटने के लिए प्रधानमंत्री सहित देश के सांसदों का एक साल तक वेतन से तीस प्रतिशत की कटौती ऐतिहासिक फैसला है। करोड़ों रुपए की राशि का राष्ट्र हित में कोरोना वायरस की माहमारी से निश्चित ही विजय हासिल करने का लक्ष्य है। संपन्नता होने के बावजूद इस माहमारी के आगे कई देशों ने घुटने टेक दिए। ऐसे में हमारे प्रधानमंत्री का साहसी कदम विपरीत परिस्थितियों में देश के नागरिकों की भावनाओं को जिंदा रखने का जीवंत प्रमाण है। साफ है कि एकजुट होकर देश के नुमाइंदे विदेशों में भी प्रेणादायी बन कर उभरेंगे। एक अच्छे प्रशासन की ऐसे समय में ही पहचान होती है कि देश के नागरिकों के लिए कितना कल्याणकारी, ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
-योगेश जोशी, कंवर कालोनी, बड़वाह

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