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चौपाल : भक्षक पूंजीवाद

पूंजीपतियों और सत्ताधारियों की मिलीभगत इतनी तगड़ी है कि एक बार विरोध होने के कारण बंद होने के बावजूद राजनीतिक दलों के परोक्ष अनैतिक सहयोग से वेदांता कंपनी ने इसे फिर शुरू करा लिया। वेदांता ग्रुप के स्टरलाइट संयंत्र के विरोध की वजह इस संयंत्र से सल्फर डाइऑक्साइड के रिसाव से होने वाली भयंकर स्वास्थ्य समस्याएं थीं।

Author May 25, 2018 3:25 AM
तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता ग्रुप की एक कंपनी स्टरलाइट कॉपर के खिलाफ हुए प्रदर्शन में गोलीबारी(PTI Photo)

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता ग्रुप की एक कंपनी स्टरलाइट कॉपर के खिलाफ हुए प्रदर्शन में गोलीबारी का पुलिसिया तांडव मौजूदा व्यवस्था के फासीवादी चरित्र को उजागर करने वाली घटना है। साफ है कि तथाकथित विकास का ढोंग असल में मनुष्यों की लाशों और प्रकृति की बर्बादी पर निजी मुनाफे की हवस पूरी करने के लिए रचा जा रहा है। इस तरह की तमाम घटनाएं दिखाती हैं कि पूंजीवादी लोकतंत्र में सरकारी मशीनरी पूंजीपतियों से अपने को जितना अलग दिखाने का ढोंग कर लेती थी, अब उसके लिए उतना भी संभव नहीं। पूंजीवादी लूट से पैदा हुआ आर्थिक संकट पूरी दुनिया को अपने जबड़े में जकड़ चुका है। अपने मुनाफे की दर बरकरार रखने के लिए वह मनुष्य और प्रकृति की हिफाजत के लिए बने अतिसीमित कानूनों तक को मानने के लिए तैयार नहीं है। मुट्ठी भर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार जहां ऐसे कानूनों को ‘श्रम सुधार’ की भ्रामक शब्दावली की आड़ में खत्म करती जा रही है, वहीं अपना दमन-तंत्र पहले से ही तैयार करके बैठी है।

पूंजीपतियों और सत्ताधारियों की मिलीभगत इतनी तगड़ी है कि एक बार विरोध होने के कारण बंद होने के बावजूद राजनीतिक दलों के परोक्ष अनैतिक सहयोग से वेदांता कंपनी ने इसे फिर शुरू करा लिया। वेदांता ग्रुप के स्टरलाइट संयंत्र के विरोध की वजह इस संयंत्र से सल्फर डाइऑक्साइड के रिसाव से होने वाली भयंकर स्वास्थ्य समस्याएं थीं। जांबिया के दो हजार गांवों ने हवा, पानी, आसपास के वातावरण को प्रदूषित करने के लिए इस कंपनी के खिलाफ मुकदमा किया है। वेदांता ग्रुप लंदन स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी है, जो प्रकृति को प्रदूषित करने के लिए कुख्यात है। देशभक्ति की दुहाई देने वालों को यहां ‘भारत माता’ की याद नहीं आएगी! दरअसल, पूंजीवादी लुटेरे प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए अपनी लागत कम करके मुनाफा पीटने की हवस में जहां एक ओर मजदूरों को श्रम निचोड़ते हैं, वहीं सारे कानूनों की धज्जियां उड़ा कर कचरा, गैस आदि को खुलेआम आसमान या नदियों में और रिवर्स बोरिंग के जरिए धरती के अंदर छोड़ देते हैं। यही वजह है कि धीरे-धीरे हमारी नदियां, पानी के स्रोत, जंगल, जीव-जंतु, खेती-बाड़ी, हवा सब भयानक प्रदूषण के शिकार हो चुके हैं। कैंसर, टीवी, दमा जैसे कई रोग महामारी की तरह फैल रहे हैं।

भारत के व्हाट्सऐप, फेसबुक से ज्ञान पाने वाला मध्यवर्ग का एक हिस्सा ‘विकास’ का कोरस गा रहा है। जबकि इस विकास की सारी मलाई पूंजीपति, नेता, ठेकेदार, अफसर खाएंगे और उसे जूठन भी नहीं मिलने वाली है। चंद लोगों के हित के लिए फासिस्टों का ‘विकास’ ऐसा है कि जिसमें बेरोजगारी, महंगाई और भुखमरी बढ़ती है, मेहनतकश बिना सुरक्षा उपकरणों के आए दिन मरते रहते हैं, मजदूरों को अपना पेट भरने के लिए बारह से चौदह घंटे खटना पड़ता है। इसमें हमारे घर यानी धरती को तबाह किया जाता है, शिक्षा, चिकित्सा जैसी सुविधाओं को भी बिकाऊ माल बना दिया जाता है, कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाएं छीन ली जाती हैं, दलितों, स्त्रियों, अल्पसंख्यकों के जीवन को बूटों तले रौंदा जाता है, ‘लोकतंत्र’ का शोर मचाया जाता है, लेकिन हक के लिए बोलने पर लोगों के मुंह में राइफल डाल के गोली दाग दी जाती है। गौरतलब है कि तूतीकोरिन में पुलिस ने हैवानियत दिखाते हुए एक लड़की के मुंह में राइफल डाल कर गोली मारी। पूरी प्रकृति को तबाह करना सबसे भयानक अपराध है और इसमें सारी दुनिया के पूंजीपति, चुनावी पार्टियां, पूरी पूंजीवादी मशीनरी शामिल है। यह विकास नहीं, पूंजीपतियों द्वारा धरती पर मानव जीवन का विनाश है। अगर हम इस पूंजीवादी व्यवस्था को इतिहास की कब्र में दफनाने के लिए मैदान में नहीं उतर पड़ते तो हम भी इस अपराध में भागीदार होंगे।
’प्रसेन, इलाहाबाद

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